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उत्तराखण्ड के लिए कार्बन क्रेडिट बन सकता है बड़ा राजस्व स्रोत: मुख्य सचिव
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि कार्बन क्रेडिट उत्तराखण्ड के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन सकता है। ई-बसें, वन पंचायतें और पैक्स से मिलेगा लाभ।
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शुक्रवार को सचिवालय में कार्बन क्रेडिट से संबंधित विषयों पर एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा कार्बन क्रेडिट की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की और इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं पर चर्चा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए कार्बन क्रेडिट भविष्य में एक महत्वपूर्ण और सतत आय का स्रोत बन सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि सभी विभाग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कार्बन क्रेडिट से जुड़ी संभावनाओं की पहचान करें और उन्हें क्रियान्वित करने के लिए पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में पर्यावरण विभाग कार्बन क्रेडिट के लिए नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि शुरुआत में ऐसे “लो-हैंगिंग फ्रूट्स” पर ध्यान केंद्रित किया जाए, जिनमें अपेक्षाकृत कम समय में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही लगभग एक हजार इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से परिवहन विभाग कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि वन पंचायतों के माध्यम से वन विभाग तथा पैक्स (PACS) के माध्यम से सहकारिता विभाग कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं। इन कार्बन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचकर संबंधित संस्थाएं अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकती हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्य सचिव ने पर्यावरण विभाग को निर्देशित किया कि कार्बन क्रेडिट से जुड़े तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं के लिए शीघ्र ही किसी सक्षम एजेंसी को नॉलेज पार्टनर के रूप में शामिल किया जाए। साथ ही, उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ इस दिशा में ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एपीसीसीएफ एस.पी. सुबुद्धि सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा नाबार्ड के उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे।
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