वित्त मंत्री सीतारमण ने कॉरपोरेट जगत से की अपील, विवादों के समाधान के लिए तुरंत अदालत का रुख न करें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय कॉरपोरेट जगत से आग्रह किया है कि वे हर विवाद को अदालत में ले जाने से बचें और कॉरपोरेट गवर्नेंस के तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस केवल बाहरी नियमों का पालन करना नहीं है, बल्कि यह संस्थानों द्वारा खुद के लिए तय किए गए मानकों पर भी निर्भर करता है।

आपसी बातचीत और शुरुआती संवाद पर जोर
एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि व्यवसायों को सरकार और नियामकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ना चाहिए। कानूनी विकल्प हमेशा उपलब्ध रहते हैं, लेकिन हर मतभेद की शुरुआत मुकदमेबाजी से होना जरूरी नहीं है। यदि शुरुआत में ही साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, चर्चाओं में गंभीरता से भाग लिया जाए और विवाद बढ़ने से पहले समाधान खोजा जाए, तो इसका काफी अधिक महत्व होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक परिपक्व अर्थव्यवस्था को बिना तुरंत विरोधी रुख अपनाए आपसी असहमति को संभालने में सक्षम होना चाहिए।
विकसित भारत 2047 और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए, वित्त मंत्री ने उद्योग जगत को केवल आकार बढ़ाने के बजाय अधिक मजबूत और लचीले उद्यम बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भारत के पास बाजार का आकार, उद्यमशीलता की ऊर्जा और संस्थागत क्षमता है, जिसका उपयोग देश की स्थायी क्षमताओं को विकसित करने के लिए किया जाना चाहिए।
अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ावा देना
भारत के विकास के अगले चरण को गुणवत्ता पर आधारित होना चाहिए। इसी दिशा में जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट घरानों को या तो इन-हाउस या शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च बढ़ाना चाहिए। इससे देश में अधिक बौद्धिक संपदा का सृजन हो सकेगा। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि हमारी महत्वाकांक्षा ‘मेड इन इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘इमेजिंड इन इंडिया’ तक पहुँचनी चाहिए, जहाँ उत्पाद देश में ही परिकल्पित और डिजाइन किए जाएं।
पारिवारिक व्यवसायों और प्रबंधन शिक्षा के लिए सुझाव
इसके साथ ही, प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक पाठ्यक्रम तैयार करने की आवश्यकता बताई गई है, जो संस्थापकों और शुरुआती कर्मचारियों को काम पर रखने, वित्तीय अनुशासन और अनुपालन जैसे विषयों में मदद कर सकें। इसके अतिरिक्त, पारिवारिक व्यवसायों के लिए भी उत्तराधिकार योजना, पेशेवर रुख और संघर्ष प्रबंधन जैसे पहलुओं पर ध्यान देने की बात कही गई है।


