सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में मुल्ला अफरोज की हिरासत की रद्द, यूपी सरकार पर लगाया जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा से जुड़े एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मुल्ला अफरोज की हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने गैर-कानूनी तरीके से एहतियाती हिरासत आदेश जारी करने पर उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस पिछले आदेश को भी पलट दिया है जिसमें इस डिटेंशन ऑर्डर को सही ठहराया गया था।

क्या है पूरा मामला और अदालत की टिप्पणी
संभल में शाही जामा मस्जिद के अदालत के आदेश पर हुए सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें चार लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में मुल्ला अफरोज को मुख्य आरोपी या मास्टरमाइंड बताया गया था। घटना के कुछ हफ्तों बाद उसे पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। बाद में अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उसके खिलाफ हिरासत का आदेश पारित किया गया था, जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरकरार रखा था। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
न्यायालय के बाहर दिए गए कबूलनामे पर कोर्ट की बात
मामلات की सुनवाई करने वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि एहतियाती हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) के लिए केवल न्यायालय के बाहर या पुलिस हिरासत में दिया गया कबूलनामे का बयान ही एकमात्र आधार नहीं बन सकता। अदालत ने पाया कि संबंधित अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का सही इस्तेमाल नहीं किया और अन्य जरूरी परिस्थितियों पर विचार किए बिना ही यह कदम उठाया। अदालत ने यह भी माना कि सिर्फ आशंका के आधार पर या ठोस सबूतों के अभाव में किसी व्यक्ति को इस तरह हिरासत में रखना सही नहीं ठहराया जा सकता है।


