फ्लाइदुबई विमान घटना के बाद बदल सकती है हवाई यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था
हाल ही में तेल अवीव जा रहे फ्लाइदुबई के एक विमान में हवा में ही एक गंभीर संकट पैदा हो गया था, जिसे भारतीय कैप्टन स्मित माछर ने अपनी सूझबूझ और अदम्य साहस से टाल दिया। इस असाधारण घटना के बाद वैश्विक विमानन जगत में सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद हवाई यात्राओं का अनुभव और सुरक्षा प्रोटोकॉल पहले जैसे नहीं रहेंगे।

कॉकपिट सुरक्षा और पायलटों की पृष्ठभूमि की जांच पर जोर
9/11 की घटनाओं के बाद विमानन सुरक्षा में कई बड़े बदलाव किए गए थे, जिसमें मुख्य रूप से कॉकपिट को बाहर से सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया था। लेकिन इस ताजा घटना ने यह अहसास करा दिया है कि कॉकपिट के भीतर से भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में आने वाले समय में पायलटों और चालक दल के सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच प्रक्रिया को और अधिक सख्त बनाया जा सकता है। इसके अलावा कॉकपिट के भीतर कैमरों की व्यवस्था किए जाने पर भी विचार किया जा सकता है, क्योंकि वर्तमान में केवल वॉयस रिकॉर्डर की सुविधा ही उपलब्ध होती है।

यात्री सुरक्षा के लिए नए नियम
विमान के भीतर सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए यात्रियों से जुड़े नियमों और पाबंदियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि यात्रियों के लिए यह कुछ अतिरिक्त पाबंदियां हो सकती हैं, लेकिन सफर को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिहाज से इसे एक आवश्यक कदम माना जा रहा है। विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों और एयरलाइंस द्वारा आने वाले दिनों में सुरक्षा के इन नए आयामों पर कड़ाई से अमल किए जाने की संभावना है।


