मद्रास उच्च न्यायालय ने कॉलेजों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन पर यूजीसी से मांगा जवाब

मद्रास उच्च न्यायालय ने कॉलेजों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन पर यूजीसी से मांगा जवाब

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को निर्देश दिया है कि वह तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्वचालित सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित करने की मांग से जुड़ी याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे। यह मामला उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा हुआ है।

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याचिका में क्या की गई है मांग?

यह याचिका मदुरै के के.के. नगर निवासी पोझिलन द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वचालित सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाई जानी चाहिए। इसके साथ ही, इस्तेमाल किए गए नैपकिन के सुरक्षित निपटान के लिए भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।

अदालत की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई

यह मामला न्यायमूर्ति वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वर्तमान में स्वचालित सैनिटरी नैपकिन वितरण की सुविधा केवल स्कूलों में उपलब्ध है, जबकि उच्च शिक्षा ले रही छात्राओं के लिए भी इस तरह की सुविधा का होना बेहद आवश्यक है।

वकील ने अदालत से यूजीसी को इस मामले में पक्षकार बनाने का अनुरोध किया, ताकि उच्च शिक्षण संस्थानों में इन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में आयोग की भूमिका तय की जा सके। दलीलों पर गौर करने के बाद, पीठ ने यूजीसी को मामले में पक्षकार के रूप में जोड़े जाने की अनुमति दी और आयोग को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई स्थगित कर दी।

मासिक धर्म स्वच्छता और दिशा-निर्देश

पूर्व में भी इस दिशा में कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत विश्वविद्यालयों के सभी महिला छात्रावासों में पर्यावरण के अनुकूल सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाने के लिए निर्देश जारी किए गए थे। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य परिसरों में स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों को बेहतर बनाना है।

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