मेघालय की राजनीति में बड़ा फेरबदल, यूडीपी के तीन विधायक एनपीपी में हो सकते हैं शामिल
मेघालय के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जहां यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) के तीन और विधायक सत्ताधारी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) का दामन थाम सकते हैं। इस संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के बाद साठ सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली एनपीपी की कुल संख्या तैंतीस से बढ़कर छत्तीस तक पहुंच सकती है। राज्य के राजनीतिक समीकरणों में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जिससे सत्तारूढ़ दल की स्थिति और अधिक मजबूत हो जाएगी।

यूडीपी की संख्या में आएगी भारी कमी
यूडीपी नेता पाल लिंगदोह के बयानों के अनुसार, पार्टी के पास पहले बारह विधायक थे, जिनमें से अब बचे हुए चार विधायकों में से तीन विधायक एनपीपी में शामिल होने जा रहे हैं। इस बड़े बदलाव के बाद राज्य विधानसभा में यूडीपी के पास केवल पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह के रूप में एकमात्र विधायक ही शेष रह जाएगा। क्षेत्रीय पार्टी के रूप में अपनी पहचान रखने वाली यूडीपी के लिए यह संगठनात्मक रूप से एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि उनके अधिकांश प्रतिनिधि अन्य दलों में शामिल हो चुके हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद आया नया मोड़
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में मेघालय विधानसभा अध्यक्ष ने यूडीपी के आठ विधायकों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में हुए विलय को आधिकारिक रूप से मान्यता प्रदान की है। इस फैसले से जुड़ी औपचारिक अधिसूचना सोलह अक्टूबर को जारी की गई थी। इस मान्यता के परिणामस्परूप यूडीपी के विधायकों की कुल संख्या बारह से घटकर सीधे चार पर आ गई थी, जबकि दूसरी ओर भाजपा की ताकत विधानसभा के भीतर दो सीटों से बढ़कर दस सीटों पर पहुंच गई थी।
गौरतलब है कि यूडीपी के इन आठ विधायकों ने पिछले महीने यानी तेईस सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के मुख्य कार्यालय में पहुंचकर औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। अब यूडीपी के अन्य बचे हुए तीन विधायकों के भी पाला बदलकर एनपीपी में शामिल होने की चर्चाओं ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। इन निरंतर हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों से मेघालय की साठ सदस्यीय विधानसभा का गणित पूरी तरह बदल गया है और सत्ताधारी दल का दायरा लगातार विस्तृत होता दिखाई दे रहा है।


