मद्रास उच्च न्यायालय ने निलंबित पुलिस अधीक्षक सुब्रमण्यम को दी अग्रिम जमानत
मद्रास उच्च न्यायालय ने पुडुचेरी पुलिस के निलंबित अधीक्षक सुब्रमण्यम को एक महिला पुलिस अधिकारी के यौन उत्पीड़न मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। यह मामला कराईकल में उनकी तैनाती के दौरान का है, जहां उनके अधीन काम करने वाली एक महिला अधिकारी ने गंभीर आरोप लगाए थे।

महिला अधिकारी के गंभीर आरोप और मामला
दिसंबर 2025 में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सितंबर 2026 में मामला दर्ज किया गया था। मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज अपने बयान में महिला अधिकारी ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन एसपी ने उसे धमकाया और कई बार उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन उत्पीड़न किया। इसके अलावा उन पर पैसे और आभूषण ऐंठने के भी आरोप लगाए गए थे। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद मामला दर्ज हुआ और आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था।
अदालत में वकीलों की दलीलें
गिरफ्तारी से बचने के लिए सुब्रमण्यम ने मद्रास उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर न्यायमूर्ति एन. रमेश के समक्ष सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि इस शिकायत पर पहले ही एक आंतरिक विभागीय जांच हो चुकी है और रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि मुख्य दस्तावेज पहले से ही पुलिस के पास हैं और याचिकाकर्ता का 37 साल का सेवाकाल बेदाग रहा है। वहीं, पुडुचेरी सरकार के वकील ने गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता पर जोर दिया।
अदालत की शर्तें और आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि यौन उत्पीड़न का आरोप बाद के बयान में सामने आया था। इसके बाद अदालत ने निलंबित पुलिस अधीक्षक को कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी। आदेश के अनुसार, उन्हें 25,000 रुपये का मुचलका भरना होगा, 15 दिनों तक प्रतिदिन थाने में हाजिरी देनी होगी और किसी भी गवाह या शिकायतकर्ता महिला से संपर्क नहीं करना होगा।


