पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने बैंकिंग संकट के बीच पद से दिया इस्तीफा
पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने देश में उत्पन्न हुए गंभीर बैंकिंग संकट के बीच अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपने इस फैसले की जानकारी दी और कहा कि उनके लिए देश की स्थिरता, सामाजिक शांति और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा सर्वोपरि है।

बैंकिंग संकट और उएनो बैंक का मामला
यह पूरा विवाद एक निजी वित्तीय संस्थान उएनो बैंक के ढहने से जुड़ा हुआ है। इस संकट के कारण हजारों ग्राहकों के सामने अपनी जमा पूंजी तक पहुंच खोने का खतरा पैदा हो गया है। पराग्वे के सेंट्रल बैंक की जांच में सामने आया था कि वित्तीय विवरणों में समायोजन के बाद बैंक की सॉल्वेंसीे रेशियो आवश्यक न्यूनतम स्तर से काफी नीचे गिर गई थी। देश की एक बड़ी आबादी को सेवाएं देने वाले इस संस्थान के संकट में आने के बाद से ही जमाकर्ताओं में गहरी चिंता बनी हुई है।
राजनीतिक दबाव और महाभियोग की प्रक्रिया
राष्ट्रपति के इस्तीफे से ठीक पहले देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। पराग्वे की चैंबर ऑफ डेप्युटीज ने एक विशेष सत्र के दौरान महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया था। विपक्षी सांसदों और सत्तारूढ़ दल के असंतुष्ट सदस्यों द्वारा राष्ट्रपति पर अपने कर्तव्यों के गंभीर और व्यवस्थित उल्लंघन का आरोप लगाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया था।
नागरिकों की जमा पूंजी की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
अपने संबोधन में पेना ने आम नागरिकों पर इस संकट के प्रभाव का जिक्र किया और कहा कि उनकी तात्कालिक प्राथमिकता वित्तीय प्रणाली में जमा किए गए धन की सुरक्षा और उसकी वापसी सुनिश्चित करना है। उन्होंने नागरिकों से क्षमा भी मांगी यदि वे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने में असफल रहे हों। अब सीनेट यह तय करेगी कि महाभियोग की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए या उनके इस्तीफे को स्वीकार किया जाए।


