राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से राजभवन में उत्तराखण्ड भ्रमण पर आए 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की।
राजभवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह से मिले 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया — राज्य की वित्तीय स्थिति और विकास योजनाओं पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा
दिनांक: [20 may 2025] | स्थान: राजभवन, देहरादून
उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून स्थित राजभवन में आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शिष्टाचारपूर्ण भेंट के अंतर्गत राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में आए आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस अवसर पर राज्य के समग्र वित्तीय विकास, बजटीय संरचना और हिमालयी राज्यों की विशेष वित्तीय आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
राज्यपाल ने आयोग के सदस्यों का उत्तराखंड में स्वागत करते हुए कहा कि राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियाँ अन्य राज्यों से काफी भिन्न हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है और ऐसे में वित्त आयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि राज्य की विशेष आवश्यकताओं और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड के लिए लचीला और सहायक वित्तीय ढांचा तैयार किया जाए।
राज्यपाल ने आयोग को यह भी अवगत कराया कि उत्तराखण्ड एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है, जहाँ पर राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से विकास कार्यों में तेजी लाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसंख्या पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की सीमाएं, और शैक्षिक संसाधनों की जरूरतों को रेखांकित किया।
डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने राज्यपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग उत्तराखण्ड के विशेष परिस्थितियों को समझता है और उसकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं। उन्होंने बताया कि आयोग का उद्देश्य राज्यों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है ताकि वे अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
राज्यपाल ने बैठक में यह भी सुझाव दिया कि आधारभूत संरचनाओं के विकास, हरित ऊर्जा, स्थायी पर्यटन, और डिजिटल सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में विशेष सहायता राज्य के लिए दी जाए। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड की युवा शक्ति और प्राकृतिक संसाधनों का उचित दोहन करने से राज्य न केवल आत्मनिर्भर बन सकता है, बल्कि देश के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर सकता है।
बैठक का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने उत्तराखण्ड के सतत और समावेशी विकास की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखण्ड की प्रकृति, संस्कृति और जनता की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि राज्य को उसकी संवेदनशील स्थिति और विशेष चुनौतियों के अनुरूप सहयोग प्रदान किया जाएगा।
यह भेंटवार्ता उत्तराखंड के विकास की दिशा में एक सार्थक पहल मानी जा रही है, जो भविष्य में राज्य के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।
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