केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट: देश के ढाई सौ जिलों में एक चौथाई युवा न पढ़ाई में और न ही रोजगार से जुड़े

केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट: देश के ढाई सौ जिलों में एक चौथाई युवा न पढ़ाई में और न ही रोजगार से जुड़े

केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े देश के युवाओं की स्थिति को लेकर एक नई चिंता सामने लाते हैं। मंत्रालय के सर्वे के अनुसार, देश के लगभग 250 जिलों में 25 प्रतिशत से ज्यादा युवा ऐसे हैं जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही किसी प्रकार के रोजगार या ट्रेनिंग से जुड़े हैं। मानव संसाधन के उपयोग के लिहाज से इन आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के प्रमुख बिंदु

मंत्रालय ने 2025 के पहले जिला-स्तरीय पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आंकड़े जारी किए हैं। इस रिपोर्ट में देश के प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 600 जिलों को शामिल किया गया है। सर्वे के मुताबिक, उत्तर भारत के राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां लगभग दो-तिहाई जिलों में युवा आबादी का एक-चौथाई हिस्सा इस श्रेणी में आता है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम और तेलंगाना के लगभग आधे जिलों में भी ऐसी ही स्थिति देखी गई है।

कम दर वाले जिले और महिलाओं की स्थिति

देश के कुछ जिलों में यह दर काफी कम भी दर्ज की गई है। लगभग 25 जिलों में यह दर 10 प्रतिशत से कम पाई गई, जिनमें छत्तीसगढ़ के कबीरधाम, राजनांदगांव और उत्तर बस्तर कांकेर, हिमाचल प्रदेश का चंबा, केरल का एर्नाकुलम और मध्य प्रदेश का मंडला शामिल हैं। ओडिशा के नबरंगपुर जिले में यह दर सबसे कम दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, युवा महिलाओं के मामले में स्थिति और अधिक गंभीर नजर आती है, क्योंकि सर्वे किए गए लगभग तीन-चौथाई जिलों में युवा महिलाओं के लिए यह दर 25 प्रतिशत से अधिक पाई गई है, जो बिना वेतन वाले घरेलू कार्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रभाव को दर्शाती है।

क्या है इस श्रेणी का अर्थ?

इस श्रेणी में आने वाले युवाओं को सीधे तौर पर बेरोजगार नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि इनमें से कई लोग किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित नहीं होते और लेबर फोर्स से बाहर होते हैं। ये युवा या तो बिना वेतन के घरेलू कामकाज या देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा रहे होते हैं, या फिर उपयुक्त काम न मिलने के कारण नौकरी की तलाश छोड़ चुके होते हैं। कुछ मामलों में वे परीक्षाओं की तैयारी में लगे रहते हैं या अन्य गतिविधियों में अपना समय बिताते हैं।

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