युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हृदय रोग, लक्षणों का इंतजार किए बिना बचाव पर देना होगा ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय से जुड़ी बीमारियां अब केवल अधिक उम्र तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि यह समस्या जीवन के सबसे सक्रिय दौर में यानी तीसरी या चौथी दहाई के लोगों को भी अपनी चपेट में ले रही है। चिंता की बात यह है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसे जोखिम वर्षों तक शरीर में चुपचाप पलते रहते हैं और इनके शुरुआती लक्षण आसानी से नजर नहीं आते हैं। जब तक गंभीर हृदय समस्या सामने आती है, तब तक बचाव के लिए बहुत कम समय बचता है।

बदलती जीवनशैली और युवाओं पर बढ़ता जोखिम
आधुनिक जीवनशैली और खानपान की आदतें इस स्थिति को और अधिक गंभीर बना रही हैं। लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना, शारीरिक गतिविधियों और कसरत की कमी, अनियमित नींद, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और तंबाकू का उपयोग युवाओं में हृदय संबंधी खतरों को लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, पेशेवर जीवन का अत्यधिक तनाव भी स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है।
नियमित जांच और रोकथाम पर जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल लक्षणों के प्रकट होने का इंतजार करने के बजाय रोकथाम यानी प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। युवाओं को बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी समय-समय पर अपने रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। जिन परिवारों में हृदय रोग का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।

कार्यस्थलों की भूमिका और चेतावनी संकेत
दफ्तरों और काम करने की जगहों पर स्वास्थ्य के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत है। लगातार बैठे रहने और काम के लंबे घंटों के बीच कर्मचारियों को थोड़ी देर टहलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए तथा स्वस्थ जीवनशैली के विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए। साथ ही, सीने में बेचैनी, सांस फूलना, असामान्य रूप से पसीना आना, चक्कर आना या जबड़े और कंधे में दर्द जैसे लक्षणों को कभी भी मामूली मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


