आराकोट अग्निकांड: बुजुर्ग महिला की मौत के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
उत्तरकाशी जिले के आराकोट बंगाण क्षेत्र में एक पुराने स्वास्थ्य केंद्र भवन में भीषण आग लगने से पार्वती देवी नामक बुजुर्ग महिला की जलकर मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद इलाके में शोक की लहर है, साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं।

अकेले रह रही थीं सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी
पार्वती देवी स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद आराकोट में अकेले जीवन बिता रही थीं। स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन बनने के बाद पुराना भवन अनुपयोगी हो चुका था, लेकिन यही जर्ण-शीर्ण और असुरक्षित ढांचा उनकी अंतिम शरणस्थली बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, विभाग की ओर से कभी यह सुध नहीं ली गई कि एक बुजुर्ग महिला असुरक्षित सरकारी भवन में किस प्रकार रह रही है।
बैंक में जमा पूंजी और संघर्षपूर्ण जीवन
जांच में सामने आया है कि मृतका के बैंक खाते में पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य मदों के रूप में लाखों रुपये जमा होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद वह अपनी दैनिक जरूरतों और भोजन पकाने के लिए जंगल से लकड़ी बीनकर लाती थीं। चूल्हे से निकली एक छोटी सी चिंगारी ने कमरे में रखी लकड़ी को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे विकराल आग भड़क गई और उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं मिला।

अग्निशमन केंद्र की मांग और प्रशासनिक लापरवाही
इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर स्थायी अग्निशमन केंद्र स्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। आराकोट एक महत्वपूर्ण बाजार और आसपास के गांवों का केंद्र होने के बावजूद दमकल जैसी आपातकालीन सुविधाओं से वंचित है। जिला मुख्यालय की दूरी अधिक होने के कारण आपात स्थिति में मदद पहुंचने में देरी होना एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार की त्रासदियों से सबक लेते हुए प्रशासन को केवल जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों में पुराने सरकारी भवनों की सुरक्षा, अकेले रहने वाले बुजुर्गों की देखभाल और अग्निशमन के पुख्ता इंतजामों की समीक्षा बेहद आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।


