सोलह साल की देरी के बाद किशोर ने कराई दुर्लभ फोंटन सर्जरी
जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित एक 16 वर्षीय किशोरी की सफल फोंटन सर्जरी की गई है, जिसका इलाज विभिन्न कारणों से लगभग 16 वर्षों तक टला रहा। अस्पताल में भर्ती होने के समय उसकी ऑक्सीजन सैचुरेशन सामान्य स्तर से काफी कम थी, जिससे उसे सांस लेने में भारी परेशानी होती थी।

बचपन से थी हृदय की समस्या
इस किशोरी को जन्म के केवल दो महीने बाद ही एक जटिल जन्मजात हृदय विकार का पता चला था। उस समय चिकित्सकों ने सर्जरी की चेतावनी दी थी, लेकिन वित्तीय परेशानियों, शिशु अवस्था में ओपन-हार्ट सर्जरी के जोखिम और छाती पर दिखने वाले बड़े निशान को लेकर परिवार निर्णय नहीं ले पाया था। जैसे-जैसे लड़की बड़ी हुई, उसकी दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने लगीं और थोड़ा चलने पर ही उसका दम फूलने लगा था।
जटिल जांच और नया सर्जिकल तरीका
लगभग 16 वर्ष की आयु होने पर परिवार ने दोबारा चिकित्सा सहायता ली। सीटी स्कैन और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने फोंटन प्रक्रिया को सबसे उपयुक्त विकल्प माना। परिवार की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए कि छाती पर बड़ा निशान न रहे, डॉक्टरों ने पारंपरिक चीरे की बजाय छाती के किनारे से इस प्रक्रिया को पूरा करने का निर्णय लिया।
सफल रिकवरी और अस्पताल से छुट्टी
डॉक्टरों के अनुसार इस आयु में यह सर्जरी करना और जोखिम भरा था, लेकिन ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। यह प्रक्रिया छाती के बीच के बजाय किनारे से की गई, जो इस तरह के मामलों में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। सर्जरी के बाद किशोरी की रिकवरी तेजी से हुई और उसे प्रक्रिया के सातवें दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। नियमित फॉलो-अप जांच में उसकी स्थिति में लगातार सुधार देखा जा रहा है।

