दिल्ली उच्च अदालत ने डीडीए पार्क में रामलीला के आयोजन पर लगाई रोक
दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बचाने के लिए डीडीए पार्क में रामलीला के आयोजन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे की अगुवाई वाली खंडपीठ ने श्री सनातन धर्म रामलीला समिति की याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।

अदालत ने खारिज की समिति की अपील
रामलीला समिति ने एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नारायणा के चिंटू पार्क में हर साल होने वाले इस आयोजन की अनुमति देने से मना कर दिया गया था और भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। समिति ने पिछले 53 वर्षों से इस स्थल पर रामलीला आयोजित करने का हवाला दिया और मांग की कि अगस्त के आदेश में संशोधन किया जाए।
हरियाली और सार्वजनिक धन की सुरक्षा
सुनवाई के दौरान रामलीला समिति ने यह आश्वासन भी देने की कोशिश की थी कि वे कार्यक्रम के बाद जमीन को उसकी मूल स्थिति में वापस ले आएंगे और प्रभावित होने वाले पौधों या हरियाली को बदल देंगे। हालांकि, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इसका विरोध किया और कहा कि अदालत के निर्देशों के बाद पार्क के विकास पर भारी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च किया गया है।
डीडीए और कोर्ट का रुख
डीडीए ने तर्क दिया कि इस तरह के आयोजनों से पार्क की हरियाली को नुकसान पहुंच सकता है और किसी भी संगठन का किसी विशेष उद्देश्य के लिए जमीन पर स्थायी अधिकार नहीं हो सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्थल की तस्वीरों का निरीक्षण किया और पाया कि पार्क के विकास में काफी निवेश किया गया है, जिसके बाद याचिका को खारिज कर दिया गया।


