मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की कानूनी छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान मिलने वाली कानूनी छूट को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है।

कानून की धारा 16 को बनाया गया है आधार
शीर्ष अदालत की पीठ ने गैर-सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ की तरफ से दायर की गई याचिका पर यह आदेश जारी किया है। इस याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान इन पदों पर बैठे अधिकारियों को असीमित सुरक्षा प्रदान करता है।
कानून में क्या है प्रावधान?
अधिनियम की धारा 16 के मुताबिक, किसी भी अदालत को मुख्य निर्वाचन आयुक्त या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक कार्यों या बयानों से जुड़ी किसी भी दीवानी या आपराधिक कार्यवाही पर विचार करने की अनुमति नहीं है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह नियम अधिकारियों को उनके पद के दुरुपयोग के मामलों में आजीवन और पूर्ण कानूनी सुरक्षा देता है।
पहले भी दाखिल की जा चुकी है याचिका
अदालत ने इस ताजा याचिका को इसी विषय से जुड़ी एक अन्य पुरानी याचिका के साथ संलग्न कर दिया है। इससे पहले इस साल जनवरी में शीर्ष अदालत ने ‘लोक प्रहरी’ नामक संगठन द्वारा दायर ऐसी ही एक याचिका पर भी केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था, हालांकि उस वक्त अदालत ने इस प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।


