जेएनयू छात्र संघ और कुलपति के बीच आमने-सामने की तकरार, भूख हड़ताल पर गरमाई राजनीति
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में चल रही छात्रों की भूख हड़ताल और विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के बयानों को लेकर विवाद तेज हो गया है। छात्र संघ ने प्रशासन के बयानों को भ्रामक बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है और गंभीर आरोप लगाए हैं।

कुलपति के बयान और प्रशासन का पक्ष
इससे पहले कुलपति ने एक बयान जारी कर कहा था कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और लोकतांत्रिक रहा है। प्रशासन के मुताबिक, अधिकारियों ने 16 अक्टूबर को सुबह के समय भूख हड़ताल स्थल का दौरा किया था, जहां कोई भी छात्र मौजूद नहीं मिला था। प्रशासन का यह भी कहना था कि नियमों के तहत निष्कासित छात्रों को भी मानवीय आधार पर पहले दिन से ही दिन में दो बार चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, छात्रों की मांगों को लेकर दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं और आगे भी चर्चा जारी रखने की बात कही गई थी। प्रशासन ने सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का हवाला देते हुए कहा था कि सरकारी धन से खरीदी गई संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है।
छात्र संघ का पलटवार और आरोप
कुलपति के इन दावों का जवाब देते हुए जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने तीखा पलटवार किया है। छात्र संघ ने आरोप लगाया कि उनके निष्कासित पदाधिकारियों को भूख हड़ताल के शुरुआती छह दिनों तक चिकित्सा जांच से वंचित रखा गया था और इस दौरान एक निजी प्रयोगशाला के जरिए स्वास्थ्य की निगरानी करनी पड़ी थी। छात्र संघ ने कुलपति के सुबह के दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल एक एजेंडे के तहत माहौल बनाने का प्रयास था। इसके अलावा, छात्र संघ ने खुद को लगभग नौ हजार छात्रों के समर्थन से चुनी गई आधिकारिक प्रतिनिधि बॉडी बताया और प्रशासन पर भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।


