छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में पेड़ों को बचाने के लिए विशेषज्ञों की मदद
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर हुए अवैध अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई के बाद उनके संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। वन विभाग ने क्षतिग्रस्त और सूख रहे पेड़ों का वैज्ञानिक तरीके से इलाज करने के लिए वृक्ष विशेषज्ञों (आर्बोरिस्ट) की सेवाएं ली हैं।

अतिक्रमण और अवैध कटाई से पेड़ों को नुकसान
अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक में आरक्षित क्षेत्र के भीतर अतिक्रमण में काफी वृद्धि हुई है। उपग्रह से प्राप्त चित्रों के तुलनात्मक अध्ययन से पता चला है कि वर्ष 2016 में जो अतिक्रमण लगभग 22 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ था, वह बढ़कर 2026 में 102.47 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इसके अलावा, तनों को छीलकर या अन्य तरीकों से पेड़ों को सुखाने और नुकसान पहुंचाने के मामले भी सामने आए हैं, जिससे वन संरक्षण को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
वैज्ञानिक पद्धति से होगा पेड़ों का उपचार
क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए कर्नाटक के जाने-माने वृक्ष विशेषज्ञ डॉ. विजय निशांत और उनकी टीम रिजर्व का दौरा कर रही है। ये विशेषज्ञ प्रभावित पेड़ों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं और उनके उपचार तथा संरक्षण में विभाग की सहायता कर रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन पेड़ों को जीवनदान देना है, जिन्हें जड़ों या छाल पर चोट पहुंचाने के बाद भी बचाया जा सकता है।
पर्यावरण और जल स्रोतों के लिए महत्व
कारका क्षेत्र केवल हरियाली के लिहाज से ही नहीं, बल्कि महानदी के जलग्रहण क्षेत्र और वन्यजीव गलियारे के रूप में भी बेहद महत्वपूर्ण है। वनों के घटने से प्राकृतिक आवासों पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए विभाग अतिक्रमण पर नियंत्रण पाने, घायल पेड़ों के उपचार और नियमित निगरानी पर जोर दे रहा है ताकि पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जा सके।


