आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने सीबोर्गियम तत्व में कमजोर रासायनिक बंधन का लगाया पता
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के शोधकर्ताओं ने एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक दल के साथ मिलकर अति भारी तत्वों के रासायनिक गुणों का अध्ययन किया है। यह शोध सीबोर्गियम (Sg) पर केंद्रित था, जो कि 106 परमाणु क्रमांक वाला एक अति भारी तत्व है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ इसके यौगिक, सीबोर्गियम हेक्साकार्बोनिल का परीक्षण किया।

अपेक्षित परिणामों से अलग आए नतीजे
वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अध्ययन में यह सामने आया कि सीबोर्गियम और कार्बन मोनोऑक्साइड के बीच का रासायनिक बंधन उम्मीद से अधिक कमजोर है। आवर्त सारणी के एक ही समूह के हल्के तत्वों, जैसे टंगस्टन, के साथ तुलना करने पर यह स्पष्ट हुआ कि भारी तत्वों में सापेक्षवादी प्रभावों के कारण इलेक्ट्रॉनों का व्यवहार बदल जाता है, जिससे उनके रासायनिक गुण भी प्रभावित होते हैं।
अति भारी तत्वों के अध्ययन की चुनौतियां
प्रयोगशालाओं में विशेष उपकरणों की मदद से तैयार किए जाने वाले अति भारी तत्व बहुत कम मात्रा में बनते हैं और बेहद कम समय में क्षय हो जाते हैं, जिससे उनका अध्ययन करना काफी कठिन होता है। इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने सीबोर्गियम के साथ-साथ टंगस्टन परमाणुओं पर भी परीक्षण किए और विशेष डिटेक्टर्स की मदद से उनके रेडियोधर्मी क्षय को रिकॉर्ड किया।

भविष्य की अनुसंधान दिशा
IIT रुड़की की प्रोफेसर मौमिता मैटी सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के इस प्रयास से अति भारी तत्वों के व्यवहार और उनके रासायनिक बंधनों को समझने में मदद मिली है। इस सफलता के बाद अब शोधकर्ता सीबोर्गियम से भी भारी तत्वों पर ऐसे ही प्रयोग करने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे आवर्त सारणी के सबसे भारी तत्वों के बारे में और अधिक जानकारी मिल सके।


