बच्चों को अपनी कल्पना की दुनिया रचने का पूरा अवसर दें
यदि किसी व्यक्ति से उस दुनिया का सपना देखने को कहा जाए जिसकी वह कल्पना करता है, तो इसे समय की बर्बादी कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। जब बच्चों से ऐसा करने को कहा जाता है, तो यह उनके लिए एक ऐसी चीज की शुरुआत बन सकता है जो वर्तमान में अस्तित्व में ही नहीं है। बच्चों के पास यह सोचे बिना सपने देखने की अनोखी क्षमता होती है कि कोई विचार व्यावहारिक, किफायती या बड़ों द्वारा स्वीकृत है या नहीं। वे उड़ने वाली स्कूल बस, खुद को साफ करने वाली नदी या किसी बुजुर्ग को सड़क पार कराने वाले रोबोट जैसी बातों की कल्पना कर सकते हैं। ऐसे विचारों पर हंसने के बजाय यह पूछना चाहिए कि इसके बारे में और बताएं।

छात्रों और युवाओं के अनूठे और प्रेरणादायक प्रयास
गोवा के चोराओ स्थित सेंट बार्थोलोम्यूज हाई स्कूल के सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों ने हाल ही में यह दिखाया कि जब बच्चों को खुद से सोचने के लिए कहा जाता है, तब क्या परिणाम सामने आ सकते हैं। भारत, पुर्तगाल और ब्राजील के छात्रों से जुड़े एक साहित्यिक प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने एक कहानी लिखी। इस कहानी में उन्होंने अपने माता-पिता को इस बात के लिए मनाया कि वे गांव की पंचायत के पास जाएं और एक ब्रिज प्रोजेक्ट के कारण खतरे में पड़े वेटलैंड को बचाने की मांग करें। इन छात्र लेखकों में से एक जेव्लिन रामोस का कहना था कि ऐसी जगहों पर पूरी तरह कंक्रीट के पुल नहीं बनाए जाने चाहिए जहां केकड़े और ऊदबिलाव निवास करते हैं।
ये बच्चे केवल वन्यजीवों पर आधारित कहानी नहीं लिख रहे थे, बल्कि यह भी कल्पना कर रहे थे कि आमजन प्रकृति की रक्षा का अधिकार रखने वाले लोगों को कैसे मना सकते हैं। उनके इन शब्दों ने उन्हें वास्तविक दुनिया की किसी समस्या का अंत बदलने की शक्ति प्रदान की। दुनिया भर के युवाओं ने यह साबित किया है कि एक अकेला सवाल किसी असाधारण यात्रा की शुरुआत बन सकता है। उदाहरण के लिए, सोलह वर्ष के एक डच किशोर बॉयन स्लैट ने ग्रीस के समुद्र में डाइविंग करते समय प्लास्टिक प्रदूषण को देखा था। यह मान लेने के बजाय कि महासागरों को साफ करना अत्यंत कठिन है, उन्होंने इस बात पर विचार करना शुरू किया कि समुद्री धाराएं तैरते कचरे को इकट्ठा करने में किस प्रकार सहायता कर सकती हैं। उनका यह स्कूल प्रोजेक्ट आगे चलकर ‘द ओशन क्लीनअप’ नामक संगठन के रूप में विकसित हुआ, जो आज नदियों और महासागरों से प्लास्टिक हटाने की तकनीक पर काम कर रहा है। इसी प्रकार, अमेरिका की गीतांजलि राव जब मात्र ग्यारह वर्ष की थीं, तब उन्होंने पेयजल में लेड का पता लगाने वाली डिवाइस का प्रारंभिक कॉन्सेप्ट तैयार किया था, जिससे उन्हें एक युवा वैज्ञानिक के रूप में पहचान मिली।

सपनों का दायरा और बड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका
सपनों को देखने का अर्थ हमेशा पूरी दुनिया को बदलना ही नहीं होता है, बल्कि इसका मतलब ऐसी बर्थडे पार्टी की कल्पना करना भी हो सकता है जहां कोई भी व्यक्ति अकेलापन महसूस न करे। इसके लिए बच्चों को एक चैलेंज दिया जा सकता है कि वे अपनी आंखें बंद करके कल्पना करें कि कल सुबह वे अपनी सपनों की दुनिया में जागेंगे। खिड़की से बाहर उन्हें साफ हवा, अधिक मजेदार स्कूल, जानवरों के सुरक्षित घर, हर बच्चे के पास दोस्त और लोगों के पास एक-दूसरे के लिए ज्यादा समय जैसी चीजें दिखाई दे सकती हैं। इसके बाद वे पेंसिल और कागज लेकर उस दुनिया का चित्र बना सकते हैं या उसके बारे में कोई कहानी लिख सकते हैं। अपने इस सपने को वास्तविकता के करीब लाने के लिए किसी बड़ी लैब या बैंक बैलेंस की आवश्यकता नहीं होती है।
माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों को तैयार-कराए गए उत्तर देने के बजाय उन्हें प्रश्न दिए जाने चाहिए। उन्हें सम्मान के साथ अपनी बात रखने, असहमति जताने, नए प्रयोग करने, गलतियां करने और पुनः प्रयास करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। जब कोई विचार कठिन प्रतीत हो, तो उसे तुरंत अस्वीकार करने के बजाय यह पूछा जाना चाहिए कि कौन-सी बात उसे मुश्किल बना रही है। यद्यपि प्रत्येक सपना सफल नहीं होता, परंतु प्रत्येक विचारशील प्रयास बच्चे को कोई न कोई मूल्यवान सीख अवश्य देता है।


