दिग्गज गायिका उषा मंगेशकर को मिलेगा पहला डॉ. भूपेन हजारिका पुरस्कार
प्रसिद्ध पार्श्वगायिका उषा मंगेशकर को नए राष्ट्रीय डॉ. भूपेन हजारिका पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। असम मंत्रिमंडल की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान नई दिल्ली में आयोजित होने वाले शताब्दी समारोह के दौरान दिया जाएगा। इस पुरस्कार के तहत एक प्रशस्ति पत्र और दस लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। भारतीय संगीत में उनके महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें इस नए पुरस्कार का पहला प्राप्तकर्ता चुना गया है।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में होगा आयोजन
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि यह कार्यक्रम नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इस विशेष और commemorative कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी शामिल होने की बात कही गई है। यह पूरा आयोजन असम के दिग्गज गायक-संगीतकार डॉ. भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोह का हिस्सा है।
हर तीन साल पर दिया जाएगा राष्ट्रीय पुरस्कार
मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, असम मंत्रिमंडल ने भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका के सम्मान में एक राष्ट्रीय पुरस्कार शुरू करने का निर्णय लिया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार हर तीन साल पर संगीत और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रदान किया जाएगा। इसी कड़ी में उषा मंगेशकर इस पुरस्कार की पहली प्राप्तकर्ता होंगी, जिन्हें भारतीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान के लिए यह सम्मान मिल रहा है।
डॉ. भूपेन हजारिका की महान सांस्कृतिक विरासत
डॉ. भूपेन हजारिका भारत के सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक रहे हैं, जिनका संगीत, कविता और रचनाएं भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं से परे थीं। उनका जन्म आठ सितंबर 1926 को असम के सदिया में हुआ था। उन्हें अपनी विशिष्ट आवाज और शक्तिशाली संगीत अभिव्यक्ति के कारण ‘सुधकांता’ या कोयल के रूप में व्यापक रूप से जाना जाता था। उनके गीतों में हमेशा मानवता, सामाजिक न्याय, समानता, सांप्रदायिक सौहार्द और साधारण लोगों के जीवन से जुड़े गहरे विषयों को प्रमुखता दी गई। हजारिका ने असमिया संगीत और संस्कृति को एक व्यापक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके कारण आज भी उनकी विरासत को पूरे देश में अत्यंत सम्मान के साथ याद किया जाता है।


