बॉम्बे हाईकोर्ट ने कारोबारी की 2017 की गिरफ्तारी को बताया अवैध, सरकार देगी 5 लाख का मुआवजा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मालाबार हिल के व्यवसायी बिपिन अग्रवाल की वर्ष 2017 में हुई गिरफ्तारी को अवैध करार दिया है। अदालत ने पाया कि एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर ने डेवलपर के साथ मिलकर कारोबारी को जबरन वसूली के मामले में झूठा फंसाया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को मुआवजे के तौर पर दो सप्ताह के भीतर 5 लाख रुपये का भुगतान करे।

पुलिस और मजिस्ट्रेट पर सख्त कार्रवाई के आदेश
अदालत ने इस मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जिसमें जरूरत पड़ने पर उन्हें निलंबित किया जाना भी शामिल है। इसके अलावा, हाईकोर्ट रजिस्ट्री को यह निर्देश दिया गया कि वह इस फैसले को अपनी प्रशासनिक समिति के सामने रखे, ताकि 64वें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के खिलाफ उचित कदम उठाए जा सकें। इन मजिस्ट्रेट ने बिना कोई ठोस कारण दर्ज किए ही व्यवसायी की कस्टडी को मंजूरी दी थी और उसे आगे बढ़ाया था।
पुलिस रिकॉर्ड में मिली गंभीर विसंगतियां
जस्टिस कमल खाता और ए.एस. गडकरी की पीठ ने इस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस बिना किसी सबूत के याचिकाकर्ता को गैंगस्टर या जबरन वसूली करने वाला साबित करने का प्रयास कर रही थी। अदालत को पुलिस रिकॉर्ड में कई गंभीर विसंगतियां मिलीं, जिनमें गिरफ्तारी फॉर्म पर ओवरराइटिंग, स्टेशन डायरी में विरोधाभासी प्रविष्टियां, गिरफ्तारी के आधार की जानकारी न होना और फोरेंसिक रिपोर्ट को छिपाने के आरोप शामिल हैं।
पीठ ने पाया कि जबरन वसूली के मामले में अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान होने के बावजूद पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि गिरफ्तारी क्यों जरूरी थी। अदालत ने माना कि गैर-कानूनी हिरासत के कारण कारोबारी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और उनकी प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची है।


