हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी और छात्र के हॉस्टल से गिरने का मामला, पुलिस कर रही है जांच
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में एक छात्र के हॉस्टल की तीसरी मंजिल से नीचे गिरने और साइबर धोखाधड़ी के संदिग्ध मामले की पुलिस द्वारा गहन जांच की जा रही है। शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि छात्र को डिजिटल संदेशों के जरिए साढ़े तीन करोड़ रुपये के अनुदान का झांसा देकर गुमराह किया गया था। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

हॉस्टल की इमारत से गिरने की घटना
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला साइबर ठगी का प्रतीत होता है और पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों का खंडन किया जिनमें छात्र की मौत का दावा किया जा रहा था। छात्र जीवित है और उसका इलाज चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में चल रहा है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से सोशल मीडिया पर भ्रामक या असत्यापित जानकारी साझा न करने की अपील की है।
अनुदान के दावों पर स्पष्टीकरण
यह पूरा मामला तब सामने आया जब रक्षा नवाचार संगठन ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि छात्र को भारतीय सेना के लिए ड्रोन विकसित करने हेतु कोई अनुदान नहीं मिला था। रक्षा मंत्रालय के तहत काम करने वाले इस संगठन ने साफ किया कि साढ़े तीन करोड़ रुपये के अनुदान के दावे पूरी तरह से झूठे और भ्रामक थे। इससे पहले हमीरपुर पॉलिटेक्निक संस्थान की ओर से केंद्र सरकार से अनुदान मिलने की जानकारी साझा की गई थी जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था। पुलिस अब इस पूरे मामले में दस्तावेजों, डिजिटल संदेशों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।


