जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एनएचएआई की अपील खारिज की
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की एक अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें जम्मू-पाठियाकोट राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के संबंध में निर्देश दिए गए थे। अदालत ने पाया कि इस जमीन के वास्तविक मालिकों को आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें एनएचएआई को या तो नए सिरे से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने या जमीन वापस करने का निर्देश दिया गया था।

राजस्व रिकॉर्ड और मालिकाना हक पर अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बाद के राजस्व रिकॉर्ड से मालिकाना हक का विवरण गायब होने मात्र से पहले के दस्तावेजों से स्थापित अधिकार खत्म नहीं हो जाते। अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि इस भूमि पर शुरुआत में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) का कब्जा था, जिसे बाद में राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दिया गया था।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जम्मू के दिगियाना गांव में सर्वे नंबर 299 के तहत आने वाली दो कनाल भूमि से जुड़ा हुआ है। एनएचएआई ने अपील में यह तर्क दिया था कि राजस्व रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता का नाम नहीं है और वह जमीन सड़क के रूप में दर्ज है। हालांकि, अदालत ने 1957 से पहले के रिकॉर्ड की जांच करते हुए पाया कि मूल दस्तावेजों में मालिकाना हक स्पष्ट रूप से दर्ज था और बिना मुआवजा दिए जमीन का उपयोग कानूनन सही नहीं है।


