डोनाल्ड ट्रम्प की राजनीतिक स्थिति में बदलाव: बारह महीनों में कैसे पलटी बाजी
महज बारह महीने पहले तक डोनाल्ड ट्रम्प अपने लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी एजेंडों को लागू करने की बेहद मजबूत स्थिति में नजर आ रहे थे। उस दौरान देश में शांति का माहौल था और अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही थी, जबकि कई जनमत सर्वेक्षणों में उनकी अप्रूवल रेटिंग भी अच्छी खासी बनी हुई थी।

लोकप्रिय नीतियों के बावजूद समर्थन में गिरावट
ट्रम्प की कई नीतियां, जैसे कि सीमा सुरक्षा को कड़ा करना और विविधता संबंधी पुराने नियमों में बदलाव करना, शुरुआत में काफी जनसमर्थन हासिल कर चुकी थीं। हालांकि, तार्किकता के बजाय आक्रामक रुख अपनाने और कुछ मामलों में हद से ज्यादा सख्ती दिखाने के कारण स्थिति बदलने लगी। विश्वविद्यालयों में नए नियम थोपने के प्रयासों और सेंसरशिप जैसी स्थितियों ने विरोध की आग को और भड़का दिया, जिससे उनकी लोकप्रियता प्रभावित हुई।
विदेश नीति और कूटनीतिक मोर्चे पर चुनौतियां
विदेश मामलों और कूटनीति के स्तर पर भी कुछ ऐसे फैसले लिए गए जिन्होंने नए विवादों को जन्म दिया। सहयोगियों के साथ बातचीत में आक्रामक रवैया अपनाने और कुछ बयानों के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहजता पैदा हुई। इसके अलावा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सैन्य अभियानों और उसके बाद ईंधन की कीमतों में आए उछाल ने घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ा दी, जिसका असर उनके पारंपरिक समर्थकों पर भी पड़ा।

अहंकार और फैसलों का असर
विश्लेषकों का मानना है कि इस बार के राजनीतिक झटके और समर्थन में आई गिरावट का मुख्य कारण प्रशासनिक निर्णयों में संतुलन की कमी और अहंकार का प्रदर्शन रहा। जिन इलाकों और राज्यों में उन्हें भारी बहुमत मिला था, वहां के मतदाताओं का भी एक वर्ग अब रिपब्लिकन नीतियों से दूरी बनाता दिखाई दे रहा है।


