दिवाली का पर्व और सुरक्षा: खुशियों के बीच बरतना होगा एहतियात
रोशनी और उमंग के पर्व दिवाली पर लोग अपने घरों को रोशन करने और खुशियां बांटने में जुटे रहते हैं, लेकिन कई बार जरा सी लापरवाही बड़े हादसों का कारण बन जाती है। हाल ही में गुजरात में हुई एक दुर्घटना ने त्योहारों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे समय में जब बच्चे और परिवार उत्सव का आनंद ले रहे होते हैं, तब जरा सी अनदेखी किसी के जीवन में बड़ा अंधेरा ला सकती है।

त्योहारों में क्यों बढ़ जाती है दुर्घटनाएं?
अभावों में जीवन बिताने वाले कई बच्चों के लिए त्योहारों का मतलब कचरे या बेकार पड़ी जगहों से छोटी-मोटी खुशियां या फेंके गए पटाखे तलाशना होता है। हाल ही की एक घटना में कुछ किशोरों द्वारा फेंके गए अवशेषों में पटाखे ढूंढने के दौरान हुए अचानक विस्फोट में तीन लड़के घायल हो गए थे, जिनमें से एक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस तरह की घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम उत्सव के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर कितने लापरवाह हो जाते हैं।
आपातकालीन सेवाओं के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं कि त्योहारों के दिनों में सड़क हादसों और जलने की घटनाओं में इजाफा हो जाता है। यह स्थिति समाज के रूप में हमारी जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है, क्योंकि शिक्षा और प्रगति के बावजूद हम हर साल ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में नाकामयाब साबित हो रहे हैं।
सुरक्षित तरीके से कैसे मनाएं पर्व?
त्योहार का मतलब अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डालना नहीं है। परिवार और बच्चे दिवाली का भरपूर आनंद लें, इसमें कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए, लेकिन यह सब सतर्कता के दायरे में होना चाहिए।

- बच्चों को कभी भी बड़ों की निगरानी के बिना पटाखे न चलाने दें।
- खतरनाक और अत्यधिक आवाज वाले पटाखों से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
- पटाखे हमेशा खुली जगहों पर ही जलाएं।
- बिना फूटे हुए या फेंके गए पटाखों को बिल्कुल हाथ न लगाएं।
प्रशासन और निर्माताओं की जिम्मेदारी
केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि निर्माताओं और प्रशासन की भी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे विस्फोटक कचरे का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करें। फैक्ट्रियों और निर्माण इकाइयों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए ताकि लापरवाही के कारण आम जनता की जिंदगी खतरे में न पड़े। यदि कोई नियमों की अवहेलना करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
असली खुशी तभी है जब त्योहार के अगले दिन हर परिवार सुरक्षित हो, बच्चे मुस्कुरा रहे हों और किसी को भी अस्पताल के चक्कर न काटने पड़ें। इस बार के उत्सव में हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम पूरी जिम्मेदारी के साथ पर्व मनाएंगे और अपनी थोड़ी सी सावधानी से हर घर में सिर्फ उजाला फैलाएंगे।


