तमिलनाडु से लापता सभी नौ मछुआरों के शव आंध्र प्रदेश के पास से बरामद
तमिलनाडु के कासिमेडु फिशिंग पोर्ट से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने गए सभी नौ मछुआरों के शव आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों से बरामद कर लिए गए हैं। इस दुर्घटना के बाद से लगातार तलाश अभियान चलाया जा रहा था, जिसके तहत सभी शवों को ढूंढ निकाला गया और औपचारिकताएं पूरी करने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।

घटना की पूरी पृष्ठभूमि
चेन्नई के कासिमेडु फिशिंग पोर्ट से सेल्वझगन की एक मोटरबोट पर सवार होकर नौ मछुआरों ने 29 अक्टूबर को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए यात्रा शुरू की थी। इस दल में बोटमैन सूर्या सहित कुल नौ लोग शामिल थे। जब वे आंध्र प्रदेश के निज़ामपट्टिनम के पास थे, तब खराब मौसम की चेतावनी के कारण उन्होंने अपनी मोटरबोट को सुरक्षा की दृष्टि से निज़ामपट्टिनम बंदरगाह पर रोका था।
इसके बाद जब वे दोबारा समुद्र में मछली पकड़ने उतरे, तो बीच समुद्र में अचानक उनकी मोटरबोट का इंजन खराब हो गया। 3 नवंबर को तड़के करीब साढ़े तीन बजे वायरलेस के माध्यम से पास की एक अन्य मोटरबोट को इस तकनीकी खराबी की जानकारी दी गई थी। इस घटना के बाद से ही इन सभी नौ मछुआरों से संपर्क टूट गया था और उनका कोई अता-पता नहीं चल पा रहा था।
तलाश अभियान और शवों की बरामदगी
लापता मछुआरों की तलाश के लिए भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया था। इस खोजबीन में हेलीकॉप्टरों और जहाजों की मदद ली गई ताकि समुद्र में लापता दल को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।
अभियान के दौरान आंध्र प्रदेश में ओंगोल के पास सात मछुआरों के शव बहकर तट पर आए। इनकी पहचान मोहन, सूर्या, मुरुगन, विजयकांत, कुप्पुसामी, कुप्पन और अरविंद के रूप में हुई। इन सातों के शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद, आंध्र प्रदेश में कोथपट्टिनम के पास लक्ष्मीपुरम बीच पर दो और मछुआरों के शव बहकर पहुंचे।
अधिकारियों ने जांच के बाद पुष्टि की कि ये दोनों शव राजेश और नारायणन के हैं। आवश्यक पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन दोनों के शव भी एम्बुलेंस के जरिए चेन्नई भेज दिए गए, जिससे सभी नौ मछुआरों के शव मिलने की पुष्टि हो गई।


