वन्य जीवों को पानी की किल्लत से बचाने को प्राकृतिक स्रोत होंगे रिचार्ज

वन्य जीवों को पानी की किल्लत से बचाने को प्राकृतिक स्रोत होंगे रिचार्ज

कोटद्वार: लैंसडौन वन प्रभाग के अंतर्गत कोल्हू नदी, खोह नदी, सुखरौ नदी, मालन नदी, सिगडड़ी स्रोत, मैली स्रोत व तेली स्रोत जैसी कई नदियां बहती हैं, लेकिन गर्मी शुरू होते ही इनमें से अधिकांश नदियों में पानी सूख जाता है, जिसके कारण जंगली जानवरों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ता है. इसके लिए वन विभाग ने अभी से कमर कसनी शुरू कर दी.

वन विभाग के कर्मचारियों ने जंगलों के अंदर बने तालाबों को पानी के स्रोतों से जोड़ना शुरु कर दिया, तो वहीं पानी के स्रोतों के समीप गड्ढे बनाकर स्रोतों को रिचार्ज भी किया जा रहा है, जिससे कि जंगली जानवरों को जंगलों के अंदर आसानी से पानी उपलब्ध हो सके.

वहीं, लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ दीपक सिंह ने बताया कि इस महीने में तो पानी की दिक्कत जंगली जानवरों के लिए नहीं होती है, लेकिन मई-जून के महीने में गर्मी अधिक बढ़ जाती है. पानी की दिक्कतें बढ़ जाती हैं, उसके लिए सभी रेंजों में वाटरफॉल को रिचार्ज किया जा रहा है. सभी प्राकृतिक स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए उनके आसपास गड्ढे बनाए जा रहे हैं, जिससे कि उससे रिसने वाला पानी गड्ढों में जमा हो जाए ताकि जंगली जानवरों को पानी उपलब्ध हो सके.

Share this content:

मेमोयर्स पब्लिशिंग उत्तराखंड पत्रकारिता के उच्च मापदंडों पर निरंतर गतिमान रहने के लिए प्रतिबद्ध है. ख़बरों की निष्पक्षता ही हमारा मुख्य उद्देश्य है. ख़बरों के सकारात्मक पक्ष को उजागर करना हम अपना दायित्व समझते है, हम डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के द्वारा समाचारों, विचारों, साक्षात्कारों की नई श्रृंखला के साथ- साथ खोजी ख़बरों को कुछ हटकर पाठकों तथा दर्शकों के सामने लाने का प्रयास कर रहे है। हमारा ध्येय है कि हमारी खबरें जनसरोकारी हो, निष्पक्ष हों, सकारात्मक हो, रचनात्मक हो, पाठकों तथा दर्शकों का मार्गदर्शन करने में सहायक हो।