द्वितीय केदार मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद; उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ रवाना

द्वितीय केदार श्री मध्यमहेश्वर मंदिर के कपाट मंगलवार सुबह 8 बजे शीतकाल के लिए शुभ मुहूर्त में बंद कर दिए गए। ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए, जिसके बाद पुजारी शिवलिंग ने बीकेटीसी अधिकारियों और गौंडारी हकहकूकधारियों की उपस्थिति में स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप देकर कपाट बंद करने की प्रक्रिया पूरी की। कपाट बंद होने के बाद श्री मध्यमहेश्वर जी की चलविग्रह उत्सव डोली प्रथम पड़ाव गौंडार के लिए रवाना हुई।
बद्रीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण के अनुसार इस वर्ष विषम परिस्थितियों के बीच 22 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। डोली 19 नवंबर को रांसी, 20 नवंबर को गिरिया में प्रवास करेगी और 21 नवंबर को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी।
ऊखीमठ में डोली के स्वागत की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। वहीं 20 से 22 नवंबर तक तीन दिवसीय मध्यमहेश्वर मेला आयोजित होगा, जिसमें 21 नवंबर को डोली मुख्य आकर्षण रहेगी। कपाट बंद होने के अवसर पर बीकेटीसी सदस्यों, प्रशासन, वन विभाग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

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