उत्तराखंड में हनी मिशन योजना पर उठे गंभीर सवाल, घटिया सामग्री और बीमार कॉलोनियों के वितरण का आरोप
खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की हनी मिशन योजना के अंतर्गत उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र में लाभार्थियों को वितरित किए गए बी-बॉक्स, टूल किट और मधुमक्खी कॉलोनियों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर लगातार मिल रही शिकायतों और पत्राचार के बाद अब यह मामला विभागीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के निरीक्षण तक पहुंच गया है।

बीमार और बिना रानी वाली मधुमक्खी कॉलोनियां मिलने का दावा
भद्रासू, नानाई, सुनकुंडी और पांव तल्ला क्षेत्र के लाभार्थियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें जो मधुमक्खी कॉलोनियां प्रदान की गईं, वे या तो सड़ी-गली थीं, मृत थीं या फिर बीमारियों से प्रभावित थीं। कई कॉलोनियों में रानी मधुमक्खी के न होने की बात भी सामने आई है। स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली इस योजना में शुरुआती स्तर पर ही ऐसी कमजोर और अनुपयुक्त कॉलोनियां मिलने से उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पर्वतीय जलवायु के अनुकूल नहीं थे उपकरण और बॉक्स
लाभार्थियों ने तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराते हुए बताया कि पर्वतीय क्षेत्र की ठंडी जलवायु के लिए टाइप-B बॉक्स अधिक उपयुक्त होते हैं, जबकि उन्हें कथित रूप से टाइप-A बॉक्स दिए गए। इसके अलावा, टूल किट में भी मानकों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। फ्रेम में मानक के अनुरूप स्टेनलेस स्टील के तार का उपयोग न करने, लोहे के सामान्य उपकरण देने और बॉक्स पर KVIC का लोगो व नंबरिंग न होने जैसी कमियां बताई गई हैं।

अधिकारियों और विशेषज्ञों द्वारा निरीक्षण
मामले में शिकायत सामने आने के बाद KVIC के राज्य कार्यालय, संबंधित अधिकारियों, सप्लायर और तकनीकी विशेषज्ञों ने क्षेत्र का दौरा कर भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम का जायजा लिया। अब इस मामले की तकनीकी रिपोर्ट KVIC के उच्च स्तर पर भेजे जाने की उम्मीद है, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई और जिम्मेदारियों का निर्धारण स्पष्ट हो सकेगा।


