ओडिशा में अंधविश्वास के विरोध के चलते दो दिन अटकी रही बुजुर्ग महिला की अंत्येष्टि, पुलिस की मदद से हुआ अंतिम संस्कार

ओडिशा में अंधविश्वास के विरोध के चलते दो दिन अटकी रही बुजुर्ग महिला की अंत्येष्टि, पुलिस की मदद से हुआ अंतिम संस्कार

ओडिशा के मयूरभंज जिले में पारंपरिक रस्मों के विरोध और विवाद के कारण एक बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार दो दिनों की देरी से हुआ। मृतक महिला के बेटे ने कुछ प्रथाओं का पालन करने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते मामला उलझ गया और पुलिस की दखलंदाजी के बाद ही स्थिति को संभाला जा सका।

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यह घटना मयूरभंज के चन्दुआ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले नुवा मालिया गांव की है। मिली जानकारी के अनुसार, रिंति मारंडी नामक बुजुर्ग महिला का निधन हो गया था, लेकिन अंतिम संस्कार से पहले निभाई जाने वाली एक स्थानीय पारंपरिक रस्म को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। ग्रामीण चाहते थे कि अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले परिवार की ओर से कुछ चीजें दी जाएं, जिसमें कथित तौर पर तीन मुर्गियां प्रदान करने की बात शामिल थी।

मृतक महिला के बेटे नीर ने इस परंपरा का कड़ा विरोध किया और ग्रामीणों की मांग को मानने से साफ मना कर दिया। बेटे के इस रुख के कारण विवाद इतना बढ़ गया कि महिला का शव दो दिनों तक बिना अंतिम संस्कार के घर पर ही रखा रहा। गतिरोध खत्म न होने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराने का प्रयास किया।

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मंगलवार रात लगभग आठ बजे महिला का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। हालांकि, अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद भी विवाद थमता नजर नहीं आया और ग्रामीणों ने कथित तौर पर नियमों की अवहेलना करने पर परिवार के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की कार्रवाई करने की बात कही।

गांव के मुखिया ध्यान चंद्र हंसदा ने बताया कि गांव की परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार से पहले तक घरों में चूल्हा जलाने पर पाबंदी होती है। उनका कहना था कि संबंधित परिवार द्वारा जानकारी न देने और नियमों का पालन न करने के कारण विवाद पैदा हुआ था। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद भी समाधान न निकलने पर स्थानीय रीति-रिवाजों के तहत फैसले लिए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, नीर का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने अंधविश्वास के चलते उनकी मां के अंतिम संस्कार में बाधा डाली। उन्होंने लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की और इस कठिन परिस्थिति में सहयोग के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त किया। चन्दुआ थाने के अधिकारी लक्ष्मण नायक ने स्पष्ट किया कि परिवार को गांव से बेदखल किए जाने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं है और इस मामले में पुलिस स्टेशन में एक शिकायत भी दर्ज कराई गई है।

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