वयस्कों में एक्ने की समस्या: कारण और बचाव के असरदार तरीके
त्वचा पर पिंपल्स और एक्ने की समस्या को आमतौर पर किशोरावस्था की पहचान माना जाता है, लेकिन कई वयस्कों को भी इस परेशानी से गुजरना पड़ता है। चेहरे के अलावा सीने, पीठ और कंधों पर भी इस तरह के स्किन ब्रेकआउट्स हो सकते हैं। सही समय पर और उचित देखभाल न मिलने पर यह स्थिति त्वचा पर गहरे निशान या दाग छोड़ सकती है।

एक्ने के मुख्य कारण
किशोरों में होने वाले पिंपल्स आमतौर पर माथे, नाक और गालों पर असर डालते हैं। इसके विपरीत, वयस्क और विशेष रूप से महिलाएं अक्सर हार्मोनल एक्ने का अनुभव करती हैं जो कि जबड़े और ठुड्डी के आसपास उभरते हैं। त्वचा के छोटे छिद्रों में तेल, बैक्टीरिया और मृत त्वचा कोशिकाओं के जमा होने से पिंपल्स बनते हैं। इसके अलावा आनुवंशिकी, हार्मोन्स, पर्यावरण और खानपान की आदतें भी एक्ने के विकास में भूमिका निभाती हैं।
पिंपल्स को लेकर क्या न करें
त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, पिंपल्स को किसी भी स्थिति में दबाना या फोड़ना नहीं चाहिए। ऐसा करने से सूजन त्वचा के भीतर गहराई तक चली जाती है जिससे संक्रमण और अधिक फैल सकता है। इसके अलावा चेहरे पर दाग और स्थायी निशान पड़ने का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है।
इलाज और उपचार के विकल्प
एक्ने के उपचार के लिए कई प्रकार की सामयिक क्रीम, लोशन और डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाइयां उपलब्ध हैं। चेहरे की त्वचा पर पसीने की ग्रंथियां अधिक होने के कारण इसका इलाज शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में थोड़ा आसान माना जाता है।
- हल्के पिंपल्स के लिए सैलिसिलिक एसिड या बेंजोइल पेरोक्साइड युक्त फेसवॉश का उपयोग किया जा सकता है।
- लगातार बने रहने वाले ब्रेकआउट्स के लिए डॉक्टर रेटिनोइड्स या एंटीबायोटिक्स की सलाह दे सकते हैं।
- गंभीर मामलों या सिस्टिक एक्ने के लिए विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है।
- हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञ अन्य चिकित्सीय उपाय सुझाते हैं।
दाग और निशानों की देखभाल
एक्ने के ठीक होने के बाद बचे हुए काले धशों और निशानों को कम करने के लिए ग्लाइकोलिक एसिड युक्त एक्सफोलिएंट्स और फेसवॉश मदद कर सकते हैं। अधिक गंभीर निशानों के लिए डर्मेटोलॉजिस्ट लेजर उपचार जैसे विकल्पों की सलाह भी दे सकते हैं। त्वचा की उचित देखभाल और सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।


