अरुणाचल प्रदेश में बांध परियोजना के विरोध में हिंसा, केंद्र सरकार ने भेजी आरएएफ की टुकड़ी
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में प्रस्तावित 11200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के विरोध में हिंसक घटनाएं सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियों को विशेष विमान के जरिए नवी मुंबई से पासीघाट भेजा गया है, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के करीब 250 जवान शामिल हैं।

पासीघाट में हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़
पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में शुक्रवार रात को जलविद्युत परियोजना के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक रूप ले लिया। उग्र भीड़ ने एनएचपीसी कार्यालय और एक स्थानीय पुलिस थाने को आग के हवाले कर दिया। इसके साथ ही, राज्य के भाजपा अध्यक्ष और दो अन्य विधायकों के आवासों पर भी तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। लगभग नौ घंटे तक रुक-रुक कर चले पथराव और हिंसा की इस घटना में 40 से अधिक पुलिसकर्मी व सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। टकराव के दौरान आंसू गैस का एक गोला लगने से एक प्रदर्शनकारी भी घायल हुआ, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रशासन द्वारा प्रतिबंध और सुरक्षा के कड़े कदम
क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए पूर्वी सियांग जिला प्रशासन ने पासीघाट, मेबो और रुकसिन क्षेत्रों में किसी भी तरह की सार्वजनिक सभाओं, रैलियों और जुलूसों के आयोजन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने फ्लैग मार्च निकाला है और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
क्यों हो रहा है सियांग परियोजना का विरोध?
इस बड़ी जलविद्युत परियोजना को तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे एक विशाल बांध के रणनीतिक जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, स्थानीय जनजातीय समुदायों और निवासियों द्वारा इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस बड़े बांध के जलाशय बनने से कई गांव और उपजाऊ कृषि भूमि डूब क्षेत्र में आ जाएगी, जिससे उनका पारंपरिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक जीवन खतरे में पड़ जाएगा।
राज्य के मुख्यमंत्री ने इस पूरी घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून को हाथ में लेना और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


