सैन्य बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए आईआईएससी और आईआईटी कानपुर आए साथ

सैन्य बुनियादी ढांचा मजबूत करने के लिए आईआईएससी और आईआईटी कानपुर आए साथ

रक्षा मंत्रालय ने सैन्य बुनियादी ढांचे को अधिक सशक्त बनाने के लिए एक नई पहल की है जिसके तहत देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में विशेषज्ञों और सैन्य अधिकारियों को एक मंच पर लाया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अत्याधुनिक हथियारों और उन्नत तकनीक वाले उपकरणों के विकास को गति दी जाएगी।

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देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों में बनेंगे कोऑर्डिनेशन सेल

आईआईएससी बेंगलुरु और आईआईटी कानपुर जैसे प्रमुख संस्थानों में डीपीएसयू कोऑर्डिनेशन सेल (DCC) स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर विशेषज्ञ और सेना के अधिकारी देश की रक्षा आवश्यकताओं के लिए जरूरी साजो-सामान, हथियारों और अन्य उपकरणों पर नियमित रूप से विचार-विमर्श करेंगे। इन सभी केंद्रों का पूरा खर्च रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाया जाएगा।

ड्रोन और हेलीकॉप्टर डिजाइन पर शोध कार्य

आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रोफेसर अभिषेक के अनुसार, संस्थान ने एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। शुरुआती चरण में दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें से एक परियोजना हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ मिलकर हेलीकॉप्टर के ब्लेड डिजाइन करने से जुड़ी है। इस कार्य में आईआईटी कानपुर की टीम अपनी विशेष भूमिका निभा रही है।

हेलीकॉप्टर के ब्लेड का निर्माण बेहद संवेदनशील प्रक्रिया होती है, इसलिए अंतिम रूप देने से पहले उनके डिजाइन और कार्यप्रणाली की गहन जांच की जाती है। इसके अलावा, अगली पीढ़ी के ऐसे ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं जिन्हें सीधे हथियारों के साथ एकीकृत किया जा सके, जिससे सैनिकों को आधुनिक तकनीकी सहायता मिल सके।

सामूहिक सहयोग से मिलेंगी तकनीकी चुनौतियां का समाधान

इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के ज्ञान और विशेषज्ञता को एक साथ जोड़ना है। यदि देश की रक्षा प्रणाली के सामने कोई तकनीकी चुनौती आती है, तो विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ मिलकर उसका समाधान निकाल सकते हैं। आईआईएससी बेंगलुरु और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों का यह आपसी तालमेल देश की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूत करने में अहम साबित होगा।

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