आने वाले दशक में तीन गुना तक बढ़ सकती है देश की जीडीपी, जानिए क्या है इसके पीछे का गणित
जेपी मॉर्गन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेमी डिमॉन द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण अनुमान सामने आया है, जिसके तहत देश की जीडीपी अगले दस वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ने की संभावना जताई गई है। इस आकलन के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था के आने वाले समय में काफी ऊंचे स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है, जिस पर आर्थिक विश्लेषकों और जानकारों द्वारा लगातार चर्चा की जा रही है।

जीडीपी वृद्धि और विकास दर का विश्लेषण
आर्थिक जानकारों का मानना है कि देश की विकास दर को लेकर पहले सामने आए कुछ अनुमानों में आंकड़ों के चयन और गणना के तरीकों को लेकर अलग-अलग तर्क दिए गए थे। पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश की वास्तविक विकास दर और मुद्रास्फीति के आंकड़ों को यदि सही परिप्रेक्ष्य में देखा जाए, तो भविष्य की तस्वीर काफी सकारात्मक नजर आती है। कोरोना काल के बाद के वर्षों में देश की नॉमिनल जीडीपी विकास दर मजबूत बनी रही है, जो भविष्य के अनुमानों का आधार तय करती है।
वैश्विक कारकों और नीतियों का प्रभाव
आर्थिक वृद्धि की गति इस बात पर भी निर्भर करती है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे संघर्षों का क्या रुख रहता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों की दिशा क्या होती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू खपत आधारित वास्तविक विकास दर भी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जानकारों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल होती हैं और मुद्रास्फीति का स्तर संतुलित रहता है, तो देश की नॉमिनल जीडीपी विकास दर अपेक्षित लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह सक्षम हो सकती है।

भविष्य की आर्थिक स्थिति का अनुमान
मौजूदा आर्थिक आकार और अनुमानित विकास दर के हिसाब से यदि देश की अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ती है, तो एक निश्चित समय-सीमा के भीतर यह अपने तय लक्ष्यों को हासिल कर सकती है। वैश्विक बाजार की स्थिरता, अनुकूल मौसमी स्थितियां और मुद्रा की स्थिति भी इसमें सहायक कारक बन सकती हैं।


