H-1B वीजा पर अमेरिकी नेता की टिप्पणी से नाराज हुआ भारत, विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति
भारत ने H-1B वीजा के जरिए होने वाली नियुक्तियों को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से दिए गए बयानों की कड़ी शब्दों में आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने उनके दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसे बयान वास्तविकता से परे हैं और भारतीय पेशेवरों के योगदान की अनदेखी करते हैं। मंत्रालय का कहना है कि एच-1बी वीजा प्रणाली से न केवल भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलते हैं, बल्कि यह अमेरिकी कंपनियों की उत्पादकता, नवाचार और अनुसंधान क्षमताओं को भी मजबूत करती है।

जेडी वेंस के दावों पर विदेश मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिकी नेता ने हाल ही में अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले विदेशियों को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों पर विदेशी कामगारों को रखने का आरोप लगाया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के दावे पूरी तरह आधारहीन हैं। अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर वहां की अर्थव्यवस्था और इनोवेशन इकोसिस्टम में अपनी उच्च शिक्षा और दक्षता के बल पर बेहद अहम योगदान दे रहे हैं।
औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाने वाली भाषा पर आपत्ति
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका का पूरा इतिहास प्रवासियों की मेहनत, उद्यमशीलता और नवाचार पर टिका हुआ है। ऐसे में दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासत की याद दिलाने वाली भाषा का उपयोग किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। मंत्रालय के अनुसार, इस प्रकार की टिप्पणियां अमेरिका की तरक्की और खुशहाली में प्रवासियों की अहम भूमिका को नजरअंदाज करती हैं।
वीजा कार्यक्रमों और स्थिति पर स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि PERM और H-1B वीजा कार्यक्रम एक-दूसरे से अलग हैं। PERM के तहत आवेदन निलंबित होने से मौजूदा H-1B वीजा की वैधता या फिर वीजा धारकों और उनके आश्रितों के कानूनी दर्जे पर किसी भी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से अधिक लोग निवास करते हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं।


