तिहाड़ जेल से बाहर आए ब्रिटिश सिख नागरिक जगतार सिंह जोहल, सात यूएपीए मामलों में मिली जमानत
ब्रिटिश सिख नागरिक जगतार सिंह जोहल को यूएपीए के तहत दर्ज सात मामलों में दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है। अदालत ने अपने फैसले में इस बात का संज्ञान लिया कि आरोपी ने आठ साल से अधिक का समय हिरासत में बिता लिया है और मामले की सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना नहीं है।

अदालत के आदेश के बाद जोहल तिहाड़ जेल नंबर 5 से बाहर आए। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बावजूद मुकदमे की गति तेज नहीं हो सकी है। ये मामले राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण द्वारा जांचे जा रहे हैं, जो साल 2016-2017 के दौरान पंजाब के लुधियाना और जालंधर जिलों में हुई लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयासों से जुड़े हैं।
एनआईए के आरोप और कानूनी प्रक्रिया
इन मामलों में से दो मामले जनवरी 2017 में लुधियाना में श्री हिंदू तख्त के अध्यक्ष अमित शर्मा की हत्या और अगस्त 2016 में जालंधर में आरएसएस नेता जगदीश कुमार गनेजा पर कथित हमले से संबंधित हैं। जगतार सिंह जोहल को साल 2017 में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसी ने उन पर खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के सक्रिय सदस्य होने का आरोप लगाया था और इस मामले में एक अंतरराष्ट्रीय साजिश का दावा किया था।
जमानत का विरोध करते हुए जांच एजेंसी ने दलील दी थी कि विदेशी नागरिक होने के कारण उनके देश से भागने का जोखिम है और उन पर गंभीर आरोप हैं। हालांकि, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल विदेशी नागरिक होने के आधार पर किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को अनिश्चितकाल के लिए सीमित नहीं किया जा सकता है।
अदालत द्वारा दी गई शर्तें
- पांच लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और उतनी ही राशि की दो जमानतें देनी होंगी।
- अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और जांच अधिकारी को अपने संपर्क विवरण देने होंगे।
- हर पखवाड़े जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा।
- मुकदमे में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने पर पाबंदी रहेगी जहां राष्ट्रविरोधी सामग्री साझा की जाती हो।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने सितंबर 2024 में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले को नए सिरे से विचार के लिए वापस उच्च न्यायालय के पास भेज दिया था।


