केरल में भ्रष्टाचार मामला: पूर्व विकास अधिकारी को तीन साल की कैद और जुर्माना
केरल की एक सतर्कता अदालत ने सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के धन में हेराफेरी करने के मामले में एक पूर्व ब्लॉक अनुसूचित जाति विकास अधिकारी को तीन-तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर कुल 10.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला आधिकारिक रिकॉर्ड में फेरबदल करके वित्तीय अनियमितताएं करने के मामलों में सुनाया गया है।

कल्याणकारी योजनाओं के धन का गबन
यह मामला वर्ष 2002-2003 के दौरान का है, जब दोषी रेणुका कुमारी एस ने पलक्कड़ में पद रहते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया था। अदालत की जांच में सामने आया कि उन्होंने आवास योजना, भूमि खरीद योजना और छात्रवृत्ति योजना के लिए आवंटित धन में से लगभग 8.96 लाख रुपये की हेराफेरी की थी। इस दौरान नकदी बही और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई थी ताकि गड़बड़ी को छिपाया जा सके।
सतर्कता जांच और अदालत का फैसला
सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) की पलक्कड़ इकाई ने वर्ष 2006 में इस अनियमितता का पता चलने के बाद मामला दर्ज किया था। गहन जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए गए। सतर्कता अदालत के न्यायाधीश के.एम. रनीश कुमार ने दोनों मामलों में आरोपी को दोषी ठहराया। हालांकि सजा विभिन्न धाराओं के तहत लंबी थी, लेकिन अदालत ने आदेश दिया कि मुख्य सजाएं एक साथ चलेंगी, जिससे कारावास की कुल प्रभावी अवधि तीन साल तक सीमित हो जाएगी।
अदालत का अगला रुख और जमानत
अदालत ने उच्च न्यायालय में अपील दायर करने के लिए दोषी को सजा निलंबित करते हुए जमानत प्रदान कर दी है। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की गई और मामले की जांच पूर्व अधिकारियों द्वारा पूरी की गई थी।


