केरलम मर्सिडीज हादसा: पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया लीपापोती और सबूत छिपाने का आरोप
केरलम के कोच्चि में एक न्यायाधीश के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार से एक स्कूटर को टक्कर लगने की दर्दनाक घटना सामने आई है। इस सड़क हादसे में पिछले 30 वर्षों से स्ट्रीट फूड की दुकान चला रहे एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जिसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस पर मामले में लीपापोती करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद केरल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।

नाबालिग के दावों की खुली पोल और सोशल मीडिया रील्स
दुर्घटना के तुरंत बाद आरोपी नाबालिग ने दावा किया था कि उसने पहली बार गाड़ी निकाली थी और यूट्यूब वीडियो देखकर ड्राइविंग सीखी थी। हालांकि, पुलिस जांच और उसके सोशल मीडिया अकाउंट से यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ। हादसे से पहले उसके सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2500 से अधिक फॉलोअर्स थे, जिन पर वह तेज रफ्तार ड्राइविंग से जुड़े वीडियो साझा करता था। सूत्रों के अनुसार, कई वीडियो में वह इसी मर्सिडीज कार को 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाते हुए दिखाई दिया था। दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर उसके अकाउंट से सभी वीडियो हटा दिए गए और प्रोफाइल को प्राइवेट कर दिया गया।
त्वरित जमानत मिलने पर भड़का परिवार
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, रविवार तड़के करीब 2:20 बजे जब यह हादसा हुआ, तब मर्सिडीज कार की गति लगभग 104 किलोमीटर प्रति घंटा थी। घटना के फौरन बाद नाबालिग को हिरासत में लिया गया, लेकिन उसे कुछ ही मिनटों में थाने से जमानत मिल गई। मृतक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और अपनी दुकान चलाकर तीन बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहा था। रात का काम खत्म कर घर लौटते समय तेज रफ्तार लग्जरी कार ने उसके दोपहिया वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। परिवार का कहना है कि इतनी गंभीर दुर्घटना के बाद इतनी जल्दी जमानत मिलना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
कार में अन्य लोगों के मौजूद होने का दावा
मृतक के बच्चों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में न्यायाधीश और पुलिस मिलकर आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और हादसे के वक्त वाहन में मौजूद अन्य लोगों की जानकारी छिपाई जा रही है। परिजनों के अनुसार, एक चश्मदीद ने बताया है कि दुर्घटना के समय कार में चार लोग सवार थे, जिनमें से तीन टक्कर के तुरंत बाद वहां से फरार हो गए और एक अन्य वाहन उन्हें लेने आया था। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि कार के पंजीकृत मालिक होने के नाते न्यायाधीश को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया जाए।
मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार
पूर्व एनसीसी कैडेट रह चुकी मृतक की बेटी ने कहा कि इस घटना और प्रशासनिक रवैये ने उनके उस विश्वास को ठेस पहुंचाई है जिसके चलते वह पुलिस सेवा में जाना चाहती थी। परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक सोशल मीडिया से रील्स हटाने या अन्य सवारों के फरार होने के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


