आधुनिक समाज में गहराता अकेलापन और घटता ‘थर्ड स्पेस’
आधुनिक समय में स्क्रीन-फोकस्ड जीवनशैली के कारण दुनिया भर के लोगों को यह महसूस होने लगा है कि आज के समाज में दोस्त मिलना सबसे कठिन कार्यों में से एक हो गया है। अकेलापन अब कई लोगों के लिए एक छिपा हुआ सच बन चुका है, जिसे दूर करने के लिए वे अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और विज्ञापनों का सहारा ले रहे हैं।

अकेलेपन से निपटने के अनोखे तरीके
अमरीका सहित कई अन्य जगहों पर लोग क्लासिफाइड विज्ञापनों के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं और गैर-रोमांटिक कनेक्शन की तलाश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल करना किसी ‘टैक्सी लाइट’ की तरह है, जो अकेलेपन को लेकर ईमानदारी को दर्शाती है। टिकटॉक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग खुलकर ‘फ्रेंडशिप एप्लिकेशन’ वीडियो साझा कर रहे हैं और अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार दोस्त बनाने के प्रयास कर रहे हैं।
‘थर्ड स्पेस’ की कमी और सामाजिक दूरियां
सामाजिक वैज्ञानिकों के अनुसार, इस स्थिति के पीछे घर और कार्यालय के अलावा अन्य सामाजिक मेलजोल की जगहों यानी ‘थर्ड स्पेस’ का घटना मुख्य कारण है। ‘थर्ड स्पेस’ उस सामाजिक माहौल को कहा जाता है जो घर और कार्यस्थल के अलावा होता है, जो सामुदायिक जीवन का आधार माना जाता है। लेकिन स्क्रीन के समय पर हावी होने और वयस्क जीवन की बढ़ती व्यस्तताओं के कारण इस तरह की सामुदायिक जगहें अब कम होती जा रही हैं।

निष्कर्ष और जरूरी बदलाव
अनेक सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है कि संतोषपूर्ण जीवन के लिए सच्चे मित्रों का होना बहुत जरूरी है। हालांकि ऑनलाइन माध्यमों से बने हर रिश्ते स्थायी नहीं हो पाते, लेकिन यह स्थिति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमें अपने सामाजिक जीवन को बेहतर बनाने और ‘थर्ड स्पेस’ को बनाए रखने के लिए नए सिरे से प्रयास करने की आवश्यकता है या नहीं।


