महाराष्ट्र एफडीए ने पुणे में सिप्ला की सुविधा का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द किया
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने पुणे के वडकी स्थित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के कैरिंग एंड फारवर्डिंग वेयरहाउस का दवा बिक्री और वितरण लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह निर्णय नियमों के कथित उल्लंघनों के चलते लिया गया है, जिसे कंपनी ने निराशाजनक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए नए सिरे से सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद की गई है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत की गई कार्रवाई
इससे पहले इसी साल 27 अगस्त को इस सुविधा के खिलाफ पैकेजिंग, भंडारण, दस्तावेज और ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट के रिकॉल से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की गई थी। उस दौरान एफडीए ने शेड्यूल एच प्रिस्क्रिप्शन दवा की पैकेजिंग पर अनधिकृत दावों और गोदाम में कई कमियों का हवाला दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत पिछली कार्यवाही को वापस लेने के बाद, एफडीए पुणे के सहायक आयुक्त (ड्रग्स) द्वारा 1 अक्टूबर को नया आदेश पारित किया गया।
पैकेजिंग और भंडारण से जुड़ी कमियां
निरीक्षण के दौरान नियामक ने पाया कि रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर ऐसे दावे और चित्र थे जो वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे, जिसे ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मिसब्रांडिंग माना गया। इसके अलावा, विभाग ने भंडारण और वेयरहाउस प्रबंधन में भी कई कमियों को सूचीबद्ध किया। इनमें आवश्यक निरीक्षण पुस्तिका का अभाव, अपर्याप्त रैक के कारण दवा के बक्से सीधे फर्श पर रखना, धूल जमा होना और एक्सपायरी दवाओं के निपटान के लिए उचित अलग क्षेत्र व एसओपी का न होना शामिल है।
सिप्ला की प्रतिक्रिया
नियामक के इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिप्ला ने एक बयान में कहा कि वह गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी ने कहा कि उन्हें पुणे के वेयरहाउस पर एफडीए का यह निर्णय निराशाजनक लगा है और उनका मानना है कि उनका गोदाम वितरण, भंडारण प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग मानकों के अनुपालन में संचालित होता है। कंपनी इस आदेश की समीक्षा कर रही है और अपने आगे के विकल्पों का मूल्यांकन कर रही है।


