जीवन के कुछ अनमोल पल और यादें, जिन्हें कैमरे में कैद नहीं किया जा सकता
जीवन में कुछ दृश्य ऐसे होते हैं जिन्हें किसी कैमरे में कैद करने की आवश्यकता नहीं होती। वे बस हमारे सामने घटित होते हैं और हम उन्हें महसूस करते हैं, जो लंबे समय तक हमारी यादों का हिस्सा बने रहते हैं। ऐसा ही एक मार्मिक अनुभव साल 1995 का है, जब घर लौटने पर एक पिता ने अपनी चार साल की छोटी बेटी को बिल्कुल अकेले बोर्ड गेम खेलते हुए देखा था।

बचपन की मासूमियत और पारिवारिक क्षति
वह बच्ची पहले अपनी दादी के साथ खेलती थी, जो पिछले कुछ महीनों से इस दुनिया में नहीं थीं। इस दृश्य को देखकर पिता की आंखें नम हो गईं क्योंकि बच्ची अभी इतनी छोटी थी कि वह इस नुकसान को समझ नहीं सकती थी। जल्द ही उसकी मां भी वहां आ गई और सभी ने मिलकर उस माहौल में एक-दूसरे का संबल बनने का प्रयास किया। उस शाम का वह साधारण सा भोजन और एक-दूसरे को खिलाने का भावुक क्षण उस गहरे खालीपन से उबरने का एक मूक जरिया बन गया था।

सफलता से ऊपर अपनों का साथ
हाल ही में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसा ही भावनात्मक पल देखने को मिला, जहां देश की जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं। मंच पर बड़े दिग्गजों के होने के बावजूद एक प्रसिद्ध डॉक्टर ने अपनी हर सफलता से ऊपर अपने छोटे पोते-पोतियों को प्राथमिकता दी। इससे यह सीख मिलती है कि जीवन में सफलता के कितने भी ऊंचे मुकाम पर पहुंच जाएं, असली कसौटी यह होती है कि क्या आप अब भी अपने करीबियों और छोटों के लिए समय निकाल सकते हैं।


