सादा जीवन और संवेदना की मिसाल थे नाना पाटेकर, पैसों से ज्यादा दर्द बांटने को मानते थे अहम
जाने-माने अभिनेता और रंगमंच कलाकार नाना पाटेकर अपने मूल सिद्धांतों और आमजन के प्रति गहरी संवेदना के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने चकाचौंध भरी लग्जरी लाइफस्टाइल को ठुकराकर एक साधारण जीवनशैली को अपनाया था। उनके जीवन से जुड़े कई संस्मरण यह सिखाते हैं कि दौलत से ज्यादा जरूरी किसी दूसरे का दर्द कम करना है।

जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से शुरू हुआ था सफर
बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से स्केच आर्टिस्ट और कैलीग्राफर की ट्रेनिंग ली थी। अपने शुरुआती दिनों में वे गलियों की दीवारों पर पेंटर के तौर पर काम करते थे और अंततः उन्होंने अपने अभिनय कौशल के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई। कॅरिअर में अच्छी कमाई करने के बावजूद उन्होंने आलीशान बंगलों के बजाय एक साधारण 750 वर्ग फीट के घर में रहना पसंद किया, जिसकी दीवारें सादी और फर्नीचर भी सामान्य था। उन्हें पढ़ना, लिखना और ग्रामीण इलाकों की शांत जिंदगी बेहद पसंद थी।
किसानों की भलाई के लिए समर्पित थी कमाई
नाना पाटेकर अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा किसानों के कल्याण और उनकी दुर्दशा सुधारने में लगाते थे। उनका मानना था कि अभिनय सिर्फ उनके जीवन के जरूरी बिल चुकाने का जरिया है। वे हमेशा आम लोगों और खासकर किसान समुदाय के साथ जुड़ाव महसूस करते थे। उनका सोचना था कि जीवन की असली दौलत यह नहीं है कि पैसा आपके लिए क्या सुख-सुविधाएं खरीद सकता है, बल्कि यह है कि वह किसी जरूरतमंद के काम आ सके।

सादगी और जमीन से जुड़ाव
उनका व्यक्तित्व हमेशा से ही अहंकार से दूर और जमीन से जुड़ा हुआ रहा। चाहे प्रेस कॉन्फ्रेंस का सादा ठिकाना चुनना हो या मारुति जेन जैसी साधारण कार में सफर करना, वे अपनी शर्तों पर और बेहद सादगी से जिए। उनके विचार और जीवन के ये सबक हमें यह सिखाते हैं कि वास्तविक संपत्ति वही है जो दूसरों के बोझ को हल्का कर सके।


