सड़क हादसों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने बढ़ाई मदद, राज्यों की सड़कों पर सुझाए जाएंगे फ्लाईओवर और अंडरपास
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने देश में सड़क हादसों को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्यों को स्थानीय सड़कों पर सुरक्षा उपाय लागू करने में मदद देने का प्रस्ताव रखा है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ सड़क सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया है।

राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों में आई कमी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, पिछले वर्ष राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और इस वर्ष भी ऐसा ही सकारात्मक रुख जारी है। मंत्रालय का मानना है कि नेशनल हाईवे पर तकनीकी और अन्य सुरक्षा उपायों को अपनाने से यह सफलता मिली है। हालांकि, देश भर में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों में और अधिक सुधार लाने के लिए अब स्थानीय सड़कों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
स्थानीय सड़कों पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं
आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल रोड नेटवर्क में स्थानीय सड़कों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार, कुल रोड नेटवर्क में नेशनल हाईवे की हिस्सेदारी 2.14 प्रतिशत, स्टेट हाईवे की 2.94 प्रतिशत और अन्य स्थानीय सड़कों की 94.92 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, सड़क हादसों की स्थिति पर गौर करें तो नेशनल हाईवे पर 31.0 प्रतिशत, स्टेट हाईवे पर 21.2 प्रतिशत और स्थानीय सड़कों पर 47.8 प्रतिशत हादसे हुए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीकी सहायता का ऑफर
हाल ही में गुजरात में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि राज्य चाहें तो नेशनल हाईवे के लिए तैयार किए गए एआई आधारित ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) ऐप और एनएचएआई के डाटालेक का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए राज्यों को केंद्र से तकनीकी परामर्श और स्वीकृति लेकर अपनी सड़कों का डाटा इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साझा करना होगा, जिसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों के माध्यम से यह आकलन भी करा सकती है कि अधिक दुर्घटनाओं वाले स्थानीय क्षेत्रों में फ्लाईओवर, अंडरपास, जेब्रा क्रॉसिंग या फुटपाथ जैसे कौन से बुनियादी ढांचे विकसित किए जाने चाहिए।


