रूस-यूरोप तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान, भारत को बताया प्राकृतिक विकल्प
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक कार्यक्रम के दौरान रूस के साथ भारत के मजबूत संबंधों और चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर देश का स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने रूस और यूरोप के बीच तनावपूर्ण हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत रूस के लिए एक बेहतरीन और प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।

रूस और यूरोप के बीच बदले समीकरण
विदेश मंत्री ने बताया कि यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और यूरोप के संबंध काफी हद तक टूट चुके हैं और दोनों के बीच गहरी कड़वाहट पैदा हो चुकी है। ऐतिहासिक रूप से रूस खुद को हमेशा से यूरोपीय राष्ट्र मानता आया है, परंतु वर्तमान परिस्थितियों के कारण उसे एशिया की तरफ रुख करना पड़ा है, जहां चीन उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस बीच, भारत ने पिछले सात-आठ दशकों से रूस के एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत लगातार रूस को यह विश्वास दिलाता रहा है कि दोनों देशों के पारंपरिक और पुराने रिश्ते पहले की तरह ही मजबूत बने हुए हैं।
एशिया में शक्ति संतुलन की महत्ता
भारतीय विदेश मंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि भारत और रूस का यह मजबूत रिश्ता केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एशिया महाद्वीप में शक्ति संतुलन को कायम रखने के लिए भी बेहद आवश्यक है। इससे रूस के पास एशिया क्षेत्र में अन्य मजबूत और भरोसेमंद विकल्प भी उपलब्ध रहते हैं।
चीन के साथ सीमा विवाद पर दो टूक संदेश
रूस के अलावा विदेश मंत्री ने चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा का कोई विधिवत निर्धारण नहीं हुआ है और यह क्षेत्रीय विवाद कई दशकों पुराना है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1975 से लेकर 2020 तक सीमाई इलाकों में शांति का माहौल था और इस दौरान एक भी गोली नहीं चली थी। हालांकि, साल 2020 की महामारी के दौरान हुई झड़पों ने इस पूरी स्थिति को बदल कर रख दिया। भारत ने चीन को यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि यदि दोनों देशों के बीच व्यापारिक और अन्य संबंध सामान्य करने हैं, तो सीमा पर शांति एवं स्थिरता बहाल करना सबसे पहली और अनिवार्य शर्त होगी।


