सिलिकॉन वैली के अरबपतियों पर बन रहीं फिल्में और बदलता सामाजिक नजरिया
हॉलीवुड की नई फिल्में अब सिलिकॉन वैली के शीर्ष अरबपतियों को उनकी महत्वाकांक्षाओं और उदासीनता के लिए कठघरे में खड़ा कर रही हैं। इन फिल्मों के मुख्य निशाने पर सैम ऑल्टमैन, मार्क जकरबर्ग और इलॉन मस्क जैसे तकनीकी जगत के जाने-माने नाम हैं।

हॉलीवुड फिल्मों में बदलता टेक दिग्गजों का चित्रण
डॉटकॉम बबल के दौर के बाद बनी फिल्में जहां तकनीक-प्रेमियों की त्रासदियों या उत्सवधर्मी कहानियों पर केंद्रित थीं, वहीं अब पर्दे पर आने वाली नई फिल्में यूनानी त्रासदियों के अधिक करीब नजर आती हैं। इन फिल्मों के जरिए सिलिकॉन वैली के इन अरबपतियों को अवसरवादी और एकाधिकारवादी के रूप में पेश किया जा रहा है। ‘आर्टिफिशियल’, ‘द सोशल रेकनिंग’ और ‘मस्क’ जैसी आने वाली फिल्में इन टेक दिग्गजों के अहंकार और सत्ता प्रतिष्ठान के साथ उनकी कथित सांठगांठ को बड़े पर्दे पर उजागर कर रही हैं।
जनता की नाराजगी और नकारात्मक होती लोकप्रियता
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी जनता इन तकनीकी उत्पादों और सेवाओं को तेजी से अपना रही है, लेकिन इसके बावजूद टेक-जगत के इन बड़े सितारों के प्रति उनका मोहभंग होता जा रहा है। इलॉन मस्क और मार्क जकरबर्ग जैसी शख्सियतों की लोकप्रियता रेटिंग्स में गिरावट आई है और लोगों में उनके प्रति व्यक्तिगत स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है। वामपंथी रुझान रखने वाला हॉलीवुड भी अब मुख्यधारा के इस असंतोष के सुर में सुर मिलाता नजर आ रहा है।

अमीरों के प्रति धारणाओं में बदलाव के मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी दिग्गजों को अब ‘अच्छे अरबपतियों’ की श्रेणी में बनाए रखना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। जनता के बीच अमीरों और सत्ताधीशों के प्रति इस तरह की धारणाओं में बदलाव समाज में बढ़ती अशांति और असंतोष का संकेत हो सकता है, जो आने वाले समय में सामाजिक उथल-पुथल की वजह भी बन सकता है।


