चुनाव आयोग के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और ECI को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अन्य सदस्यों की सहमति के बिना अकेले निर्णय लेने के आरोपों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आयोग के निर्णय कानूनी प्रक्रिया या बहुमत के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो उनके संबंध में उचित सफाई पेश करनी होगी।

याचिका में उठाए गए संवैधानिक सवाल
दायर की गई याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के अधिकारों और कार्यप्रणाली को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संस्थागत निर्णयों में सामूहिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कई फैसले अन्य आयुक्तों की जानकारी के बिना लिए गए। इस मामले में मतदाता सूची से जुड़े बदलावों और अन्य प्रशासनिक कदमों पर भी गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े किए गए हैं। अदालत के समक्ष यह दलील भी दी गई कि निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है, इसलिए इसके कामकाज में सभी सदस्यों की उचित भागीदारी और सहमति का प्रावधान महत्वपूर्ण है।
अदालत की टिप्पणी और आगे की प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि यदि निर्णयों में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो अदालत के पास उन्हें रद्द करने का अधिकार सुरक्षित है। हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कोई त्वरित आदेश पारित नहीं किया जा सकता, इसलिए सभी पक्षों से औपचारिक जवाब मांगा गया है। अदालत इस मामले में आगे की प्रक्रिया तय करने से पहले संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी।


