मतदाता सूची संशोधन और फॉर्म-6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को भेजा नोटिस
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ यह पड़ताल करेगी कि फॉर्म-6 में किए गए बदलाव कानूनी प्रावधानों के अनुसार थे या नहीं।

फॉर्म-6 और SIR प्रक्रिया पर क्यों खड़े हुए सवाल?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब सुप्रीम कोर्ट में कुछ याचिकाएं दाखिल की गईं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि SIR प्रक्रिया से जुड़े कई अहम फैसले चुनाव आयोग के सभी सदस्यों की आपसी सहमति के बिना लिए गए। याचिकाओं में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की अनुमति इसके लिए नहीं ली गई थी, और विभिन्न मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ उनके मतभेद भी सामने आए थे।
मुख्य चुनाव आयुक्त के निलंबन की मांग खारिज
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित करने का अनुरोध भी याचिकाकर्ताओं द्वारा किया गया था। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के निलंबन की इस मांग को स्वीकार नहीं किया और फिलहाल खारिज कर दिया।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि मतदाता सूची संशोधन से जुड़े इन महत्वपूर्ण बदलावों को लागू करने में तय कानूनी नियमों का पालन हुआ था या नहीं। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करना होगा।


