चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट, 17 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह चुनाव आयोग (ECI) की निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया और उसके हर पहलू की गहन जांच करेगा। यह महत्वपूर्ण कदम उन गंभीर आरोपों के बीच उठाया गया है, जिनमें दावा किया गया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सहित कई प्रमुख फैसले बिना आम सहमति के लिए गए थे।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि उसे सब पता है और वह इसकी जांच करेगी। सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन-सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई 17 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाबी हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है।
आंतरिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आग्रह
सुनवाई के दौरान विपक्ष के नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने अदालत से आग्रह किया कि चुनाव आयोग को अपने फैसलों से जुड़ी फाइल नोटिंग और आंतरिक बातचीत को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए। उनका तर्क था कि यह रिकॉर्ड यह पता लगाने के लिए बहुत जरूरी है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे या एकतरफा रूप से।
चुनाव आयोग का पक्ष और हलफनामा
इससे पहले, चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पुरजोर बचाव किया और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फॉर्म 6’ में किसी भी तरह के बदलाव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग का कहना था कि उस पर सवाल उठाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है और हलफनामा दाखिल करने का निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें याचिकाकर्ता आयोग के हलफनामे पर अपना प्रतिउत्तर पेश करेंगे।


