उत्तराखंड के इस गांव ने बदली ग्रामीण जीवन और तकनीक की परिभाषा
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में स्थित सरमोली गांव ने अपनी अनूठी पहल से ग्रामीण और शहरी जीवन के बीच की दूरियों को कम करने की एक मिसाल पेश की है। भारत सरकार द्वारा देश का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव चुने गए इस क्षेत्र में पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक तकनीक का एक बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है। यहां के स्थानीय लोग अपनी पारंपरिक जीवनशैली को सहेजते हुए डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं।

परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम
सरमोली गांव में हर साल गर्मियों के दौरान एक सप्ताह तक चलने वाले हिमाल कलासूत्र उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस उत्सव के तहत स्थानीय लोग लगभग 20 किलोमीटर लंबी मैराथन दौड़ में हिस्सा लेते हैं, जिसमें करीब 8,000 फीट की ऊंचाई चढ़नी होती है। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में पक्षी देखना, ध्यान-योग सत्र और डिजिटल साक्षरता की कार्यशालाएं भी शामिल होती हैं। यह आयोजन साबित करता है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीण समुदाय नई चीजों को सीखने में पीछे नहीं हैं।
महिला सशक्तिकरण और माटी संगठन
गांव में महिलाओं के उत्थान के लिए सक्रिय ‘माटी संगठन’ जैसे स्वयं-सहायता समूह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यहां की महिलाएं एक साथ कई भूमिकाएं निभा रही हैं, जैसे होमस्टे का संचालन करना, उद्यमी बनना, गाइड की जिम्मेदारी संभालना और घरेलू जिम्मेदारियों को निभाना। तमाम व्यक्तिगत और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद ये महिलाएं अपनी आजीविका को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं और एक-दूसरे का समर्थन करती हैं।

डिजिटल माध्यमों से अपनी कहानी खुद कह रहे हैं ग्रामीण
शुरुआती डिजिटल प्रशिक्षण मिलने के बाद अब इस गांव के लोग अपने सोशल मीडिया चैनल खुद संचालित कर रहे हैं। सीमित सुविधाओं और सामान्य फोन के बावजूद वे अपने पहाड़ों, मौसम और जीवन से जुड़ी कहानियों को सीधे दुनिया के सामने रख रहे हैं। उनकी फोटोग्राफी और कहानी कहने की क्षमता में लगातार सुधार हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक जीवन के बीच की सीमाएं किस प्रकार खूबसूरती से मिट सकती हैं।


