एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद विद्या रामराज ने कहा, महिलाएं खेल जगत में पुरुषों के बराबर रख सकती हैं कदम
तमिलनाडु की प्रतिभाशाली एथलीट विद्या रामराज ने एशियाई खेलों में शानदार सफलता हासिल करने के बाद कहा है कि महिलाएं खेल जगत में पुरुषों के बराबर मुकाम हासिल कर सकती हैं। उन्होंने हाल ही में अपनी बेहतरीन दौड़ और पदकों की बदौलत देश का नाम रोशन किया है।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड और शानदार प्रदर्शन
विद्या रामराज ने 400 मीटर हर्डल्स स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिनिश लाइन पार की और देश के लिए पदक जीता। इस दौरान उन्होंने एक लंबे समय से चले आ रहे पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं की रिले स्पर्धा और मिक्स्ड रिले इवेंट में भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश को पदक दिलाए। इस महान उपलब्धि के बाद से उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं और राज्य सरकार की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया है।
संघर्षों से भरा शुरुआती सफर
कोयंबटूर की रहने वाली विद्या रामराज का यह सफर आसान नहीं रहा है। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाली विद्या ने बचपन से ही मेहनत और लगन के साथ दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया। उनकी जुड़वां बहन नित्या रामराज भी एक एथलीट हैं। उनके शुरुआती साल संघर्षपूर्ण रहे, लेकिन निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
कोच और परिवार का मिला समर्थन
वापस लौटने पर चेन्नई के नेहरू इनडोर स्टेडियम में उनका स्वागत किया गया। एक विशेष बातचीत में उन्होंने साझा किया कि पुराने रिकॉर्ड को तोड़ना उनके लिए बेहद संतोषजनक पल था। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच, परिवार, राज्य सरकार और खेल संगठनों के सहयोग को दिया। विद्या के अनुसार, उनके कोच ने हमेशा उन्हें पदकों की चिंता करने के बजाय अपने कौशल और समय में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, जिससे उनका मानसिक तनाव कम हुआ।
माता-पिता से खास अपील
युवाओं और अभिभावकों के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों का पूरी तरह से समर्थन करना चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा की तरह ही खेलकूद भी जीवन में उतना ही महत्वपूर्ण है। एशियाई खेलों की इस बड़ी सफलता के बाद अब वह आगामी विश्व चैंपियनशिप की तैयारियों में जुट गई हैं।


